नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब के बाद तबाही का पूरा पैमाना लगातार सामने आ रहा है। ताजा मीडिया अपडेट्स के मुताबिक मृतकों की संख्या 962 तक पहुंच गई है और हजारों लोगों का अब भी पता नहीं चल पाया है। हालांकि नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के सोमवार शाम के आधिकारिक आंकड़ों में 939 लोगों की मौत और 3,925 लोगों के लापता होने की पुष्टि की गई थी। राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण इन आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।
इस बीच बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित नुवाकोट जिले के बेत्रावती इलाके से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां बाढ़ और मलबे में दबे एक मकान से एक साथ 23 शव बरामद किए गए हैं। शुरुआती आशंका है कि मृतकों में कुछ तीर्थयात्री भी हो सकते हैं। शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
नुवाकोट के एक मकान से एक साथ मिले 23 शव
रिपोर्ट्स के मुताबिक नुवाकोट के विदुर नगरपालिका क्षेत्र के बेत्रावती में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान एक तीन मंजिला मकान मलबे की चपेट में आ गया था।
सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचावकर्मियों ने इसी मकान से 23 शव बरामद किए। इनमें से ज्यादातर शव घर के ऊपरी हिस्से में मिले हैं। माना जा रहा है कि अचानक पानी बढ़ने के बाद वहां मौजूद लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपर की मंजिलों की ओर जाने की कोशिश की थी, लेकिन बाढ़ और भारी मलबे ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया।
ताजा लाइव अपडेट्स में भी बेत्रावती के एक मकान से मंगलवार सुबह 23 शव बरामद किए जाने की पुष्टि की गई है।
मृतकों के तीर्थयात्री होने की आशंका
स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार शवों के आसपास बैग और अन्य सामान भी मिला है। इसी आधार पर आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में गोसाईंकुंड की यात्रा पर निकले तीर्थयात्री हो सकते हैं।
हालांकि सभी मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। प्रशासन शवों और मौके से मिले सामान की मदद से उनकी पहचान करने में जुटा हुआ है।
बताया जा रहा है कि बरामद शवों में एक महिला और छोटी बच्ची के शव भी मिले हैं। आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही जगह पर बड़ी संख्या में लोगों के फंस जाने की आशंका है।
जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिल पर पहुंचे थे लोग
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि जब बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा तो मकान में मौजूद लोगों ने ऊपरी मंजिल पर पहुंचकर सुरक्षित रहने की कोशिश की। लेकिन पानी के साथ आया मिट्टी, पत्थरों और मलबे का तेज बहाव मकान को घेरता चला गया।
बाढ़ ने रासुवा और नुवाकोट समेत कई क्षेत्रों में मकानों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में बनी हुई है जहां सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है।
लापता लोगों की तलाश जारी
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार सोमवार शाम तक देश में 939 लोगों के शव बरामद हो चुके थे और 3,925 लोग लापता थे। इनमें 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
अलग-अलग मीडिया संगठनों के मंगलवार सुबह के अपडेट में मौतों का आंकड़ा 962 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है। आपदा के इतने बड़े पैमाने और कई दुर्गम क्षेत्रों से संपर्क टूटने के कारण मृतकों तथा लापता लोगों की वास्तविक संख्या लगातार अपडेट हो रही है।
रासुवा और नुवाकोट जिले सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।
उत्तरगया में छात्रों को लेकर भी चिंता
बेत्रावती स्थित उत्तरगया पब्लिक स्कूल को भी बाढ़ से गंभीर खतरा पैदा हुआ था। शुरुआती रिपोर्टों में बड़ी संख्या में छात्रों के लापता होने की खबरें सामने आईं। हालांकि स्थानीय मीडिया की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक स्कूल के 370 से अधिक छात्रों और शिक्षकों को समय रहते ऊंचे स्थान की ओर निकाल लिया गया था।
स्कूल प्रशासन अब भी कुछ छात्रों के ठिकाने की पुष्टि करने की कोशिश कर रहा है। इसलिए सोशल मीडिया और कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में सामने आए करीब 350 छात्रों के लापता होने के आंकड़े को फिलहाल अंतिम आधिकारिक संख्या नहीं माना जा सकता।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनलों में रेस्क्यू सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल में इस आपदा का सबसे गंभीर असर हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर पड़ा है। रासुवा और नुवाकोट के कई प्रोजेक्टों की टनलें मिट्टी, पानी और मलबे से भर गई हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी और मजदूर अब भी संपर्क से बाहर हैं।
अपर त्रिशूली-3A परियोजना में करीब 42 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। वहीं अपर त्रिशूली-3B को लेकर अलग-अलग अपडेट्स में संख्या बदलती रही है। हालिया रिपोर्ट्स में 122 लोगों के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई है।
बाढ़ के कारण टनलों के प्रवेश द्वार अवरुद्ध हो गए हैं। कई जगह सेना और विशेषज्ञ टीमों को भारी मशीनरी, सर्चलाइट, ड्रोन और नियंत्रित विस्फोट की मदद से रास्ता बनाने की कोशिश करनी पड़ रही है।
भारतीय रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा
नेपाल की मदद के लिए भारत ने विशेष टनल रेस्क्यू विशेषज्ञ और मेडिकल टीम भेजी है। भारतीय दल नेपाली सेना के साथ मिलकर रासुवा के चिलीमे और लांगटांग क्षेत्रों में प्रभावित हाइड्रोपावर टनलों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय दूतावास के अनुसार विशेषज्ञ टीम नेपाली सेना के साथ संयुक्त सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। खराब मौसम, मलबे से भरी टनलों और मुश्किल पहाड़ी भूगोल के बावजूद अभियान जारी है।
भारत के अलावा चीन, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों की विशेषज्ञ टीमें भी नेपाल के राहत एवं बचाव प्रयासों में सहयोग कर रही हैं।
26 अगस्त की बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आए विनाशकारी सैलाब ने भोटेकोशी नदी के रास्ते रासुवा और नुवाकोट में भारी तबाही मचाई। पानी के साथ बड़ी मात्रा में पत्थर, मिट्टी और मलबा नीचे की ओर बहता चला गया।
इससे सड़कें और पुल बह गए, कई गांव प्रभावित हुए और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि सेना, पुलिस और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीमें लगातार लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।
आपदा प्रभावित इलाकों में खराब मौसम और भूस्खलन का खतरा राहत अभियान को और मुश्किल बना रहा है। आने वाले दिनों में मलबा हटने और दुर्गम इलाकों तक बचाव दल पहुंचने के साथ मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में और बदलाव की आशंका है।
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