पंजाब यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद ओडिशा के छात्र संघ चुनाव में भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी जीत हासिल की है। अभिजीत दिपके के GenZ आंदोलन और राहुल गांधी के दिल्ली में प्रदर्शन के बीच यह तीसरा बड़ा छात्रसंघ चुनाव है, जहां विपक्ष खासकर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI को करारी हाल मिली है। एबीवीपी ने ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में से 8 में जीत हासिल की है। विपक्षी बीजू छात्र जनता दल (BCJD) को पांच यूनिवर्सिटी में सफलता मिली है। NSUI को किसी यूनिवर्सिटी में जीत नहीं मिली। विद्यार्थी परिषद की इस जीत से सीएम मोहन चरण मांझी के साथ बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व भी गदगद है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे युवाओं का पीएम नरेंद्र मोदी में भरोसा बताया।
आठ साल बाद ओडिशा में हुए छात्रसंघ चुनाव
ओडिशा में लगभग आठ साल के अंतराल के बाद कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए गए। शुक्रवार को राज्य के 320 कॉलेजों और 13 विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधियों के चयन की प्रक्रिया पूरी हुई।
उपलब्ध चुनावी विवरण के अनुसार, कुल 6,891 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें से 1,398 उम्मीदवार निर्वाचित हुए। इनमें 756 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि 642 उम्मीदवारों ने मतदान के जरिए जीत हासिल की। लंबे समय बाद हुए इन चुनावों को छात्र राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव के दौरान एबीवीपी, बीजू छात्र जनता दल और एनएसयूआई के बीच प्रमुख मुकाबला देखने को मिला।
13 विश्वविद्यालयों में से 8 में ABVP की जीत
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में से आठ में अध्यक्ष पद जीतने का दावा किया है। संगठन के अनुसार, उसे 11 विश्वविद्यालयों में महासचिव या संबंधित प्रमुख पदों पर भी सफलता मिली है।
एबीवीपी ने दावा किया है कि छह विश्वविद्यालयों में उसके उम्मीदवारों ने पूरे पैनल पर जीत दर्ज की। इससे संगठन ने विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति का प्रदर्शन किया है।
इन चुनाव परिणामों को एबीवीपी के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संगठन ने हाल के छात्रसंघ चुनावों में अपनी सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के समर्थन से जोड़कर प्रस्तुत किया है।
ABVP ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव पदों पर भी किया जीत का दावा
एबीवीपी की प्रदेश सचिव दीप्तिमयी प्रतिहारी के अनुसार, संगठन ने विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष के आठ, उपाध्यक्ष के आठ, सचिव के दस और सहायक महासचिव के 11 पदों पर जीत हासिल की है।
उन्होंने बताया कि प्रतिष्ठित उत्कल विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने पूरे पैनल पर जीत दर्ज की है। वहीं, रेवेनशॉ विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद को छोड़कर अन्य प्रमुख पदों पर एबीवीपी के उम्मीदवार सफल रहे।
हालांकि, रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में संगठन को अध्यक्ष पद पर हार का सामना करना पड़ा। इन परिणामों से स्पष्ट होता है कि एबीवीपी ने कई विश्वविद्यालयों में मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण परिसरों में विपक्षी छात्र संगठनों ने भी उसे चुनौती दी।
बीजू छात्र जनता दल को पांच विश्वविद्यालयों में सफलता
ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में बीजू जनता दल से जुड़े छात्र संगठन बीजू छात्र जनता दल ने भी महत्वपूर्ण प्रदर्शन करने का दावा किया है। बीसीजेडी की प्रदेश अध्यक्ष इप्शिता साहू के अनुसार, राज्य के लगभग 55 से 60 प्रतिशत छात्रसंघों में उनके संगठन से जुड़े उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।
बीजू छात्र जनता दल ने रमा देवी महिला विश्वविद्यालय और रेवेनशॉ विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्यक्ष पद जीतने की जानकारी दी है। इसके अलावा संगठन ने राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्रियों केवी सिंह देव और प्रवती परिदा से जुड़े क्षेत्रों में भी सफलता मिलने का दावा किया है। इस प्रकार विश्वविद्यालयों के अध्यक्ष पदों पर एबीवीपी को बढ़त मिलने के बावजूद बीसीजेडी ने कॉलेज स्तर पर व्यापक समर्थन मिलने की बात कही है।
NSUI के प्रदेश अध्यक्ष विभूति भूषण महापात्रा ने बताया कि कांग्रेस के छात्र संगठन ने चित्रकोंडा, कांटाबांजी और लुइसिंघा के 30 कॉलेजों में अध्यक्ष पद जीते हैं, जबकि 80 अन्य कॉलेजों में वे दूसरे स्थान पर रहे।
पंजाब और दिल्ली के बाद ओडिशा में ABVP की सफलता की चर्चा
ओडिशा छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के हालिया छात्र राजनीति संबंधी घटनाक्रमों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। देश में युवाओं, विशेषकर जेनरेशन Z की राजनीतिक भागीदारी को लेकर जारी चर्चाओं के बीच एबीवीपी ने ओडिशा में अपनी चुनावी सफलता को महत्वपूर्ण बताया है।
हालांकि, अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ चुनाव स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों, कैंपस की परिस्थितियों और छात्र संगठनों की सक्रियता से भी प्रभावित होते हैं। इसलिए किसी एक राज्य के छात्रसंघ परिणाम को पूरे देश के युवाओं की राजनीतिक पसंद का अंतिम संकेत नहीं माना जा सकता।
अमित शाह और नितिन नवीन ने ABVP को दी बधाई
ओडिशा में एबीवीपी के प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी खुशी जताई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने एबीवीपी की चुनावी सफलता की सराहना करते हुए इसे युवाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के प्रति विश्वास से जोड़ा। भाजपा नेताओं ने छात्रसंघ चुनावों में एबीवीपी की सफलता को सकारात्मक राजनीतिक संकेत के रूप में प्रस्तुत किया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया युवाओं के भरोसे की जीत
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की सफलता पर संगठन के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के विश्वास को दर्शाती है।
माझी ने पिछली बीजू जनता दल सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक स्वार्थों के कारण लंबे समय तक छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए गए। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी सरकार ने छात्रसंघ चुनाव बहाल करके विद्यार्थियों से किया गया वादा पूरा किया है और कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दोबारा मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं को नेतृत्व क्षमता विकसित करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं।
नवीन पटनायक ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में भाजपा सरकार की ओर से अनुचित तरीके अपनाए गए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में पटनायक ने बीजू जनता दल और बीजू छात्र जनता दल के उन नेताओं तथा कार्यकर्ताओं की सराहना की, जिन्होंने चुनाव में भाग लिया और पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के लिए काम किया।
पटनायक ने दावा किया कि विपक्षी छात्र संगठनों ने सरकार के कथित दबाव और अनुचित तरीकों के बावजूद मुकाबला किया। हालांकि, ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनके आधार पर चुनावी अनियमितताओं को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
ओडिशा छात्रसंघ चुनाव में किस संगठन का कैसा रहा प्रदर्शन?
उपलब्ध विवरण और छात्र संगठनों के दावों के अनुसार, विश्वविद्यालय स्तर पर एबीवीपी ने आठ अध्यक्ष पद जीतकर बढ़त हासिल की है। बीजू छात्र जनता दल को पांच विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष पद पर सफलता मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं, एनएसयूआई को विश्वविद्यालय स्तर पर कोई अध्यक्ष पद नहीं मिला।
कॉलेज स्तर पर बीसीजेडी ने लगभग 55 से 60 प्रतिशत छात्रसंघों में जीत का दावा किया है, जबकि एनएसयूआई ने लगभग 30 कॉलेजों में अध्यक्ष पद जीतने की बात कही है।
ओडिशा की राजनीति पर क्या होगा छात्रसंघ चुनाव का असर?
ओडिशा में आठ साल बाद छात्रसंघ चुनावों की वापसी राज्य की छात्र राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
एबीवीपी की विश्वविद्यालय स्तर पर बढ़त को भाजपा समर्थक राजनीतिक वर्ग सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है। वहीं, बीजू छात्र जनता दल ने कॉलेज स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति का दावा करके यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेडी का छात्र आधार अब भी सक्रिय है। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाना संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखा जा सकता है।
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