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SIR पर मोदी सरकार को मिला चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण का साथ, विपक्ष पर उठाए सवाल

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर जारी विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के CM चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी CM पवन कल्याण ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन किया।

SIR पर मोदी सरकार को मिला चंद्रबाबू नायडू और पवन कल्याण का साथ, विपक्ष पर उठाए सवाल

देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन के कई दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दो प्रमुख सहयोगी नेताओं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने SIR प्रक्रिया का समर्थन किया है। दोनों नेताओं का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग की आलोचना कर रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है। दोनों दल केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। हालांकि, SIR चुनाव आयोग द्वारा संचालित प्रक्रिया है और इसकी संवैधानिक जिम्मेदारी केंद्र सरकार से अलग है।

नायडू ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे चुनाव परिणाम अपने पक्ष में नहीं आने पर चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं। वहीं, विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

1 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस की रैली से पहले आया समर्थन

SIR को लेकर NDA के सहयोगियों का समर्थन ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है। इस रैली के माध्यम से कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांग्रेस इस कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा सकती है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं ने कई पात्र मतदाताओं के सामने कठिनाइयां पैदा की हैं।

कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया आवश्यक है, लेकिन इसे लागू करते समय मतदाताओं के अधिकारों, दस्तावेजों की उपलब्धता और प्रशासनिक पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

दूसरी ओर, NDA के सहयोगी दलों का तर्क है कि मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और अपात्र व्यक्तियों की प्रविष्टियों की पहचान करना चुनावी व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए जरूरी है।

चंद्रबाबू नायडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में INDIA गठबंधन पर साधा निशाना

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों की आलोचनाओं का जवाब दिया।

नायडू ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव परिणामों के आधार पर चुनावी प्रक्रिया के प्रति अपना रुख बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब चुनाव परिणाम विपक्ष के अनुकूल आते हैं, तब चुनावी व्यवस्था पर भरोसा जताया जाता है, लेकिन प्रतिकूल परिणाम आने पर उसी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को भागीदारी का अवसर दिया गया था। उनके मुताबिक, सभी दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों (BLA) को प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, जबकि बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) समन्वय का कार्य कर रहे थे। नायडू ने सवाल उठाया कि यदि विपक्षी दलों को प्रक्रिया से आपत्ति थी, तो उन्होंने पुनरीक्षण के दौरान अपनी चिंताओं को प्रभावी तरीके से क्यों नहीं उठाया।

कांग्रेस के कार्यकाल में आई थीं EVM, नायडू ने विपक्ष से पूछा सवाल

चंद्रबाबू नायडू ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भी विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की शुरुआत कांग्रेस के शासनकाल के दौरान हुई थी। नायडू ने विपक्षी दलों से सवाल किया कि चुनाव जीतने पर ईवीएम को स्वीकार किया जाता है, लेकिन हार के बाद उसी तकनीक की विश्वसनीयता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं।

भारत में ईवीएम का प्रयोग पहली बार 1982 में केरल के एक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में सीमित स्तर पर किया गया था। इसके बाद कानूनी प्रावधानों और तकनीकी प्रक्रियाओं के विकास के साथ इनका उपयोग बढ़ाया गया। हालांकि, ईवीएम से जुड़े विवाद और मतदाता सूची के SIR की प्रक्रिया दो अलग चुनावी विषय हैं। EVM मतदान और मतगणना से संबंधित तकनीक है, जबकि SIR का संबंध मतदाता सूची की जांच और संशोधन से है।

SIR प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को शामिल होने का अवसर मिला: नायडू

चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में बूथ स्तरीय एजेंटों और अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूची की जांच और सत्यापन प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया गया था।

नायडू ने तर्क दिया कि राजनीतिक दलों को प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर आरोप लगाने से पहले उपलब्ध प्रक्रियात्मक अवसरों और तथ्यों पर विचार किया जाना चाहिए।

जगन मोहन रेड्डी पर भी चंद्रबाबू नायडू ने साधा निशाना

SIR को लेकर चंद्रबाबू नायडू ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी की भी आलोचना की। नायडू ने आरोप लगाया कि जगन मोहन रेड्डी राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार SIR पर अपना रुख बदलते रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक सुविधा के आधार पर अपनाया गया रवैया बताया।

मुख्यमंत्री ने चुनावों के दौरान बूथों पर कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि CCTV निगरानी जैसी व्यवस्थाएं चुनावी प्रक्रिया की निगरानी में मदद कर सकती हैं। उनका कहना था कि तकनीक और प्रशासनिक निगरानी का उपयोग चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

SIR पर NDA के कई सहयोगी दलों का समर्थन

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर भाजपा को अपने कई सहयोगी दलों का समर्थन मिलने की जानकारी सामने आई है। इन दलों में तेलुगु देशम पार्टी, जन सेना पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, जनता दल सेक्युलर, शिवसेना का एकनाथ शिंदे गुट, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का अजित पवार गुट, राष्ट्रीय लोक दल, असम गण परिषद, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा, अपना दल (सोनेलाल), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और आजसू जैसे दल शामिल हैं।

इन दलों का समर्थन अलग-अलग राजनीतिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में सामने आया है। कुछ सहयोगियों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आवश्यकता का समर्थन किया है, जबकि कुछ ने प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और मतदाताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे सहयोगियों ने भी चुनाव आयोग से मतदाता सूची को लेकर जनता के बीच मौजूद भ्रम दूर करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने की आवश्यकता जताई है।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, RJD और अन्य विपक्षी दल क्यों कर रहे SIR का विरोध?

विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, वामपंथी दलों और तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। विपक्ष की प्रमुख चिंता यह है कि दस्तावेजी सत्यापन की जटिल प्रक्रिया के कारण आर्थिक रूप से कमजोर, प्रवासी, बुजुर्ग और अन्य पात्र मतदाताओं को अपने नाम मतदाता सूची में बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया के दौरान अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों का मूल्यांकन वास्तविक मतदाता सूची, हटाए गए नामों के कारणों और उपलब्ध अपील प्रक्रिया के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

चुनाव आयोग का घोषित उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, गलत प्रविष्टियों की पहचान करना और पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करना है। विवाद मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि प्रक्रिया को लागू करते समय मतदाताओं के अधिकारों और प्रशासनिक निष्पक्षता की पर्याप्त सुरक्षा की गई या नहीं।

SIR क्या है और चुनाव आयोग इसे क्यों लागू करता है?

SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। यह भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की विस्तृत जांच और संशोधन के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों की पहचान करना, मृत व्यक्तियों के नाम हटाना, स्थान बदल चुके मतदाताओं की प्रविष्टियों की जांच करना, दोहरी प्रविष्टियों को ठीक करना और पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल करना है।

विशेष गहन पुनरीक्षण सामान्य मतदाता सूची संशोधन की तुलना में अधिक व्यापक सत्यापन प्रक्रिया हो सकती है। इसमें बूथ स्तरीय अधिकारियों द्वारा घर-घर संपर्क, मतदाता विवरण का सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों की जांच और दावे-आपत्तियों के निस्तारण जैसे चरण शामिल हो सकते हैं। मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना निष्पक्ष चुनावों के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि किसी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित प्रक्रिया के मतदाता सूची से न हटे।

बिहार से शुरू हुआ SIR विवाद, पश्चिम बंगाल में भी उठे सवाल

जून 2025 में बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया था। बिहार में पुनरीक्षण के दौरान लाखों मतदाता प्रविष्टियों को लेकर जांच और संशोधन की प्रक्रिया अपनाई गई।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, बिहार में 60 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की खबरों ने राजनीतिक विवाद को बढ़ाया। हालांकि, ऐसे आंकड़ों का मूल्यांकन करते समय प्रारूप सूची और अंतिम सूची के बीच अंतर, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की प्रविष्टियां तथा दावे-आपत्तियों के बाद हुए संशोधनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पश्चिम बंगाल में भी SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता नामों को लेकर विवाद सामने आया। उपलब्ध जानकारी में लगभग 90 लाख नाम हटाए जाने का उल्लेख है, लेकिन इस आंकड़े की अंतिम आधिकारिक स्थिति और बाद में पुनः शामिल किए गए नामों का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है। विपक्षी दलों ने इन घटनाक्रमों के आधार पर चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग की।

SIR में आधार कार्ड और पुराने दस्तावेजों को लेकर क्या विवाद हुआ?

विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं से मांगे जाने वाले दस्तावेज भी विवाद का प्रमुख विषय रहे हैं। कई मामलों में मतदाताओं को पुरानी मतदाता सूचियों से अपना या अपने परिवार का संबंध स्थापित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता बताई गई। बिहार में प्रारंभिक चरण के दौरान चुनाव आयोग ने स्वीकार्य दस्तावेजों की एक सूची जारी की थी, जिसमें आधार कार्ड को लेकर विवाद पैदा हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और अदालत ने आधार के उपयोग तथा मतदाता सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

यह समझना जरूरी है कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज हो सकता है, लेकिन यह अपने आप में भारतीय नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है। मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए नागरिकता, आयु और सामान्य निवास जैसी वैधानिक शर्तें लागू होती हैं। दस्तावेजों को लेकर विवाद का मुख्य मुद्दा यह रहा कि ऐसे मतदाता, जिनके पास पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर और उचित वैकल्पिक व्यवस्था मिलनी चाहिए।

फॉर्म-6 विवाद क्या है? नए मतदाताओं के पंजीकरण पर क्यों उठे सवाल?

SIR से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण विवाद फॉर्म-6 को लेकर सामने आया। फॉर्म-6 का उपयोग नए पात्र मतदाताओं के पंजीकरण के लिए किया जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कुछ राज्यों में ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था। इसमें आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी।

इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक दलों और नागरिकों ने सवाल उठाए। आलोचकों का तर्क था कि सभी नागरिकों के पास इतने पुराने मतदाता रिकॉर्ड उपलब्ध होना जरूरी नहीं है और ऐसी शर्तों से नए मतदाताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

बाद में चुनाव आयोग द्वारा उन राज्यों में अतिरिक्त घोषणा पत्र की अनिवार्यता हटाए जाने की जानकारी सामने आई, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। फॉर्म-6 से जुड़े इस विवाद ने मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में स्पष्ट दिशा-निर्देश और समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता को प्रमुखता से सामने रखा।

SIR पर राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग की भूमिका अहम

SIR को लेकर जारी विवाद के केंद्र में भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। आयोग का कार्य चुनावों का संचालन करना और मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करना है।

एक ओर NDA के कई दल पुनरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी दल मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा, पारदर्शिता और शिकायत निवारण की व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

इस विवाद का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रक्रियाओं, विश्वसनीय आंकड़ों, दावे-आपत्तियों के प्रभावी निस्तारण और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा है।

1 नवंबर की कांग्रेस रैली पर नजर, SIR विवाद बना राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा

आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली के कारण SIR का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ सकता है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपनी चिंताओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं।

वहीं, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के समर्थन ने यह स्पष्ट किया है कि NDA के प्रमुख सहयोगी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आवश्यकता के पक्ष में खड़े हैं।

 

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