पंजाब में नशे की समस्या एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। मानसा जिले के भाममे कलां गांव में रहने वाले 34 वर्षीय दलजीत सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश पैदा कर दिया है।
दलजीत सिंह के परिवार का दावा है कि उनकी मौत नशीले पदार्थों के सेवन से हुई। हालांकि, पुलिस ने इसे हत्या से जुड़ा मामला बताया है। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब परिवार दलजीत का शव लेकर मानसा में चल रहे नशा-विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने जा रहा था।
परिजनों और प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दलजीत के शव को अपने कब्जे में लेकर चला गया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि उसके कर्मचारियों पर हमला होने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।
21 दिनों से नशे से दूर था दलजीत, फिर अचानक मिली लाश
दलजीत सिंह की पत्नी परमजीत कौर के अनुसार, उनके पति लंबे समय से नशे की लत से जूझ रहे थे। वह इस लत से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे थे और पिछले 21 दिनों से नशीले पदार्थों से दूर थे। परमजीत ने बताया कि दलजीत बिना किसी को बताए घर से बाहर गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह वापस लौट आएंगे, लेकिन बाद में उनकी मौत की खबर मिली।
परिवार को आशंका है कि घर से बाहर रहने के दौरान दलजीत ने दोबारा किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया होगा। उनका शव भरवानंदी गांव के पास सड़क किनारे मिला था। दलजीत अपने पीछे पत्नी, 14 वर्षीय बेटे और पांच वर्षीय बेटी को छोड़ गए हैं। पिता की मौत के बाद दोनों बच्चों और उनकी मां पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
बेटे को नशे से बचाने के लिए पिता ने किया हर संभव प्रयास
दलजीत सिंह के पिता जरनैल सिंह सेवानिवृत्त पशु चिकित्सक हैं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह आसपास के गांवों में पशुओं का इलाज करके परिवार का खर्च चलाते थे। परिजनों और पड़ोसियों के मुताबिक, जरनैल सिंह अपने बेटे को नशे की लत से बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। वह दलजीत को अपने साथ पशुओं के इलाज के काम पर ले जाने लगे थे, ताकि उनका ध्यान नशीले पदार्थों से हट सके।
पड़ोसी हरदेव सिंह के अनुसार, जरनैल ने बेटे को बचाने के लिए बहुत संघर्ष किया। परिवार की आर्थिक स्थिति भी लगातार बिगड़ती चली गई। पड़ोसियों का दावा है कि दलजीत और उनकी लंबे समय से बीमार मां के इलाज तथा घर का खर्च उठाने के लिए परिवार को अपनी लगभग तीन एकड़ जमीन बेचनी पड़ी थी। इसके बावजूद परिवार को नशे की समस्या से राहत नहीं मिल सकी।
पिता जरनैल सिंह के लापता होने का आरोप, परिवार ने पुलिस पर उठाए सवाल
दलजीत की मौत के बाद उनके पिता जरनैल सिंह के कथित तौर पर लापता होने से मामला और गंभीर हो गया। पड़ोसियों के अनुसार, मंगलवार देर रात पुलिस जरनैल सिंह को उनके घर लेकर आई थी। आरोप है कि पुलिस दलजीत के अंतिम संस्कार के लिए परिवार से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाना चाहती थी।
परिजनों द्वारा सहमति देने से इनकार किए जाने के बाद पुलिस कथित तौर पर जरनैल सिंह को अपने साथ ले गई। पड़ोसी हरदेव सिंह का कहना है कि जरनैल पुलिस से रुकने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। इसके बाद से परिवार और पड़ोसियों का उनसे संपर्क नहीं हो सका।
हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से अलग स्थिति स्पष्ट की है। डीआईजी हरजीत सिंह के अनुसार, जरनैल सिंह पुलिस हिरासत में नहीं हैं। ऐसे में परिवार के आरोपों और पुलिस के बयान के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
पुलिस ने मौत को बताया हत्या का मामला, तीन लोग हिरासत में
दलजीत सिंह की मौत को लेकर पुलिस का पक्ष परिवार के दावों से अलग है। रिपोर्ट के अनुसार, एसएसपी विभव चौधरी ने बताया कि दलजीत का शव किसी व्यक्ति द्वारा सड़क किनारे फेंका गया था। मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, डीआईजी हरजीत सिंह ने बताया कि दलजीत सिंह के शव का पोस्टमार्टम बठिंडा स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में किया जा चुका है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे में मौत का वास्तविक कारण मेडिकल रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल परिवार की ओर से नशे के कारण मौत की आशंका जताई गई है, जबकि पुलिस मामले की जांच हत्या के पहलू से कर रही है।
नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या से जुड़ा विरोध प्रदर्शन
दलजीत सिंह का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, 13 अक्टूबर को मानसा में झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया है कि कथित तौर पर नशीले पदार्थ बेचने के आरोप में एक फार्मासिस्ट से उनका विवाद हुआ था।
इस घटना के बाद पंजाब के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। झोटा नशे के खिलाफ अभियान चलाने के लिए जाने जाते थे। उनके समर्थकों का कहना है कि वह युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और नशीले पदार्थों की कथित अवैध बिक्री का विरोध करने के लिए सक्रिय थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी पंजाब के अपने हालिया दौरे के दौरान नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की थी, जिनमें झोटा का परिवार भी शामिल बताया गया है।
पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शन स्थल पहुंचा दलजीत का परिवार
दलजीत की मौत और पुलिस कार्रवाई के बाद परिवार ने नशा-विरोधी आंदोलन से जुड़ने का फैसला किया। पड़ोसियों के मुताबिक, बुधवार सुबह दलजीत की पत्नी, बच्चे, बहन और मां घर से निकलकर झोटा की हत्या के विरोध में चल रहे प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए।
परिवार को कथित तौर पर पुलिस के दबाव की आशंका थी। इसी कारण उन्होंने मुख्य सड़कों के बजाय गांव की छोटी गलियों से होकर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने का रास्ता चुना। दलजीत की पत्नी और दोनों बच्चे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे और न्याय की मांग से जुड़े आंदोलन में शामिल हुए।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी प्रदर्शन स्थल पहुंचे और दलजीत सिंह के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पुलिस के पास दलजीत का शव है, तो क्या परिवार की सहमति के बिना उसका अंतिम संस्कार करने की योजना बनाई जा रही है?
चन्नी ने इस पूरे घटनाक्रम को मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शोक में डूबे परिवार के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह चिंताजनक है। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
दलजीत सिंह की मौत और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लिया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, आयोग ने मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
इस रिपोर्ट में दलजीत की मौत, पुलिस की कार्रवाई और उससे जुड़े आरोपों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद यह मामला केवल संदिग्ध मौत की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और परिवार के अधिकारों से भी जुड़ गया है।
तीन एकड़ जमीन बिक गई, लेकिन बेटे को नशे से नहीं बचा सका परिवार
दलजीत सिंह की कहानी पंजाब में नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों की आर्थिक और सामाजिक परेशानियों को भी सामने लाती है। पड़ोसियों के अनुसार, परिवार ने इलाज और घरेलू जरूरतों के लिए अपनी जमीन तक बेच दी थी। पिता लगातार काम करके परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे थे। इसके बावजूद दलजीत की मौत ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया।
गांव के लोगों का कहना है कि नशे की समस्या केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति, सामाजिक जीवन और भविष्य को प्रभावित करती है। दलजीत के दो छोटे बच्चों का भविष्य भी अब परिवार और समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है।
झोटा के संघर्ष को याद कर भावुक हुए ग्रामीण
भाममे कलां गांव के निवासी हरदेव सिंह ने नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि वह पहले भी उनके गांव आए थे। हरदेव के अनुसार, झोटा ने गांव के पास एक ढाबे के आसपास कथित नशीले पदार्थों की बिक्री का विरोध किया था और कुछ लोगों से गोलियों से भरा थैला बरामद करने का दावा किया था।
उन्होंने कहा कि उस समय गांव के कई लोग झोटा के अभियान की गंभीरता को पूरी तरह नहीं समझ पाए थे। लेकिन दलजीत की मौत के बाद ग्रामीणों को नशे के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन का महत्व अधिक स्पष्ट महसूस हो रहा है। हरदेव ने झोटा और उनके परिवार के संघर्ष को युवाओं के भविष्य के लिए किया गया बड़ा बलिदान बताया।
पंजाब में नशे की समस्या और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल
दलजीत सिंह की संदिग्ध मौत ने पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल दलजीत की मौत के वास्तविक कारण को लेकर है। परिवार नशे को जिम्मेदार मान रहा है, जबकि पुलिस हत्या के पहलू से जांच कर रही है। दूसरा सवाल दलजीत के शव को पुलिस द्वारा अपने कब्जे में लेने की परिस्थितियों से जुड़ा है।
तीसरा सवाल पिता जरनैल सिंह के ठिकाने को लेकर है। परिवार और पड़ोसी उनसे संपर्क नहीं होने की बात कह रहे हैं, जबकि पुलिस ने उनके हिरासत में होने से इनकार किया है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है।
दलजीत सिंह की मौत ने फिर उजागर किया पंजाब का नशा संकट
पंजाब के मानसा जिले में दलजीत सिंह की मौत एक परिवार की त्रासदी के साथ-साथ नशे की समस्या और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बन गई है। एक ओर परिवार अपने सदस्य को खोने के दुख से जूझ रहा है, दूसरी ओर शव को लेकर हुए विवाद और पिता के कथित तौर पर लापता होने के आरोपों ने उसकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी और परिवार के साथ पारदर्शी व्यवहार महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस की आगे की जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी है।
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