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जहाँ से फोटो कॉपी कराती थी स्कूल-कॉलेज की लड़कियाँ, वहाँ से नंबर निकालता था इसराइल मोहम्मद

जहाँ से फोटो कॉपी कराती थी स्कूल-कॉलेज की लड़कियाँ, वहाँ से नंबर निकालता था इसराइल मोहम्मद

दमोह, मध्य प्रदेश से सामने आया यह मामला लव जिहाद और पहचान की धोखाधड़ी से जुड़ा गंभीर और चिंताजनक प्रकरण है। आरोपी इसराइल मोहम्मद खान, जिसने “शिवा शर्मा” बनकर सोशल मीडिया पर हिंदू युवतियों को फँसाया, न सिर्फ फर्जी पहचान का उपयोग कर रहा था, बल्कि उसने युवतियों की निजता का उल्लंघन कर उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें भी जुटाई थीं।

इसराइल का पर्दाफाश साइबर कैफे में आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराते समय हुआ, जब ऑनलाइन पेमेंट के दौरान उसका असली नाम सामने आ गया। पुलिस ने प्रारंभ में धोखाधड़ी (IPC 319) के तहत केस दर्ज किया, लेकिन उसके मोबाइल से मिली जानकारियों के आधार पर मामला काफी गंभीर हो गया, जिसके चलते ATS (Anti-Terrorism Squad) को जाँच सौंपी गई।

मामले की प्रमुख बातें:

  1. फर्जी पहचान का इस्तेमाल:
    इसराइल मोहम्मद ने ‘शिवा शर्मा’ नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया और सोशल मीडिया पर हिंदू नाम से युवतियों को फँसाया।

  2. साइबर कैफे में खुलासा:
    आरोपी की असलियत उस समय उजागर हुई जब आधार कार्ड की फोटोकॉपी कराते वक्त ऑनलाइन पेमेंट के दौरान उसका असली नाम इसराइल मोहम्मद खान सामने आया।

  3. युवतियों को फँसाने की सुनियोजित रणनीति:
    आरोपी ने फोटोकॉपी की दुकान से हिंदू लड़कियों की लिस्ट तैयार की, सोशल मीडिया पर संपर्क किया, प्रेमजाल में फँसाकर आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए।

  4. ATS की जाँच:
    मामला गंभीर होता देख एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को बुलाया गया। ATS की प्रारंभिक जाँच में लव जिहाद की पुष्टि हुई है।

  5. फिलहाल कोई पीड़िता सामने नहीं आई:
    पुलिस ने धारा 319 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया है, लेकिन अभी तक किसी लड़की ने लव जिहाद या यौन शोषण को लेकर औपचारिक शिकायत नहीं की है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और कदम:

  • स्टेट एसआईटी (Special Investigation Team) का गठन किया गया है ताकि राज्यभर में लव जिहाद जैसे मामलों की निगरानी की जा सके।

  • भोपाल ATS सक्रिय रूप से मामले की जाँच कर रही है और आरोपी के संपर्कों, धार्मिक स्थलों और डिवाइस डेटा की छानबीन कर रही है।

समाज और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय:

यह मामला दर्शाता है कि कैसे तकनीक और फर्जी दस्तावेज़ों का उपयोग कर धार्मिक पहचान छुपाकर लड़कियों को शिकार बनाया जा रहा है। यह सिर्फ एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा बनता जा रहा है।

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