पाकिस्तान में ड्रोन हमले से चार बच्चों की मौत — ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पश्तूनों पर बढ़ा जुल्म
भारत के ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिए 15 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन पाकिस्तान अब भी इस मिशन के मनोरोगी प्रभाव से नहीं उबर पाया है। उसकी सेना खौफ और भ्रम की स्थिति में नागरिकों को भी आतंकी समझकर ड्रोन हमलों का शिकार बना रही है। इसका ताजा उदाहरण उत्तरी वज़ीरिस्तान के हुरमज़ क्षेत्र में सामने आया है, जहां एक ड्रोन हमले में चार मासूम बच्चों और उनकी मां की जान चली गई।
क्या हुआ ड्रोन हमले में?
- पाकिस्तानी सेना ने 21 मई को उत्तरी वज़ीरिस्तान के हुरमज़ गांव में ड्रोन हमला किया।
- सेना को संदेह था कि वहां आतंकी मौजूद हैं, लेकिन हमला निर्दोष पश्तून परिवार पर हुआ।
- इस हमले में चार बच्चे और उनकी मां की मौत हो गई।
पश्तून कार्यकर्ता फज़ल उर रहमान अफरीदी की प्रतिक्रिया
पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट (PTM) के कार्यकर्ता अफ़रीदी ने कहा:
“पाकिस्तानी सेना पश्तून इलाकों को हथियारों के परीक्षण के लिए प्रयोगशाला बना चुकी है।”
उनके प्रमुख आरोप:
- 32 से ज्यादा ड्रोन हमले सिर्फ पश्तून क्षेत्रों में (उत्तर व दक्षिण वज़ीरिस्तान, टैंक जिला) किए गए।
- पाक सेना ने 55,000+ तालिबान लड़ाकों और उनके परिवारों को इन इलाकों में बसाया।
- फिर उन्हीं को “आतंकवादी” बताकर हमले करने का बहाना बना रही है।
- असली मकसद: प्राकृतिक संसाधनों (खनिज, गैस, तेल) पर नियंत्रण।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर अफरीदी का समर्थन
- अफरीदी ने कहा कि भारत का ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ सही कदम था।
- उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तानी सेना ने पश्तूनों पर दमन और तेज़ कर दिया है।
- अब निर्दोष बच्चे, महिलाएं और बुज़ुर्ग ड्रोन हमलों का निशाना बन रहे हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पृष्ठभूमि
- 22 अप्रैल: पहलगाम नरसंहार — आतंकियों ने 26 नागरिकों को उनके धर्म पूछकर मार डाला।
- 7 मई: भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।
- 9 आतंकी ठिकानों को टारगेट किया गया।
- जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा के अड्डे नष्ट हुए।
- हमले POK में बालाकोट, मुजफ्फराबाद, रावलकोट, बाघ आदि में किए गए।
निष्कर्ष: पाकिस्तान की दोहरी विफलता
- सेना का भ्रमित रवैया — अपने ही नागरिकों को आतंकी समझकर मारना।
- अंतरराष्ट्रीय बदनामी — पश्तून समुदाय के नेताओं का खुला विरोध और भारत के ऑपरेशन का समर्थन।
भारत ने इस ऑपरेशन के जरिये दुनिया को यह संदेश दिया है कि अब वह कड़े सैन्य जवाब के साथ-साथ नैतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी विजयी हो रहा है।