छात्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में 75 वर्षों की यात्रा
9 जुलाई 1949 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से स्थापित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने “छात्र आज का नागरिक” और “छात्रशक्ति – राष्ट्रशक्ति” का उद्घोष करते हुए भारतीय छात्र आंदोलन के इतिहास में एक नई क्रांतिकारी धारा प्रवाहित की। तब से लेकर आज तक, परिषद ने राष्ट्र निर्माण को ध्येय मानते हुए शिक्षा, समाज, संस्कृति, राजनीति और नीति निर्माण में छात्रों की भूमिका को सशक्त और प्रभावी बनाया है।
विगत छात्र संगठनों की तुलना में, जिन्होंने छात्रों को केवल नेताओं के पिछलग्गू के रूप में इस्तेमाल किया, विद्यार्थी परिषद ने युवाओं को राष्ट्र और समाज निर्माण में निस्वार्थ सेवक और सशक्त भागीदार बनाया। परिषद में सम्मिलित प्रत्येक सदस्य स्वयं को भारतीयता से प्रेरित, राष्ट्र समर्पित और सामाजिक उत्तरदायित्व से युक्त मानता है।
निर्माण में योगदान देने वाले प्रेरणास्रोत
दत्ताजी डीडोलकर, यशवंतराव केलकर, ओमप्रकाश बहल, केशव देव वर्मा, दत्ताजी होसबाले, मदनदास देवी, सुनील आंबेकर और वर्तमान संगठन मंत्री आशीष चौहान जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और अनुशासन से आज परिषद 45 लाख से अधिक छात्र सदस्यों का एक विशाल संगठन बन चुका है।
शिक्षा सुधार से लेकर राष्ट्रवाद तक
“ठीक करेंगे तीन काम, प्रवेश, परीक्षा और परिणाम” जैसे अभियानों के माध्यम से परिषद ने शिक्षा व्यवस्था में सुसंगति और पारदर्शिता लाने का कार्य किया। साथ ही, परिषद ने अपने कार्य को केवल आंदोलन तक सीमित न रख, प्रत्येक कार्यकर्ता के परिवार और समाज से जुड़ाव के रूप में विस्तारित किया।
परिषद की चार प्रमुख विशेषताएं
- बहुआयामी नेतृत्व निर्माण – मंच संचालन, कार्यक्रम प्रबंधन, संसाधन एकत्रीकरण से लेकर नीति निर्माण तक छात्र विभिन्न भूमिकाओं में प्रशिक्षित होते हैं।
- चरित्र निर्माण और नैतिकता – परिषद का जोर सदाचार, नशामुक्ति और समाजोपयोगी जीवनशैली पर रहता है।
- राष्ट्रवाद और संस्कृति के प्रति जागरूकता – परिषद भारत की संस्कृति, संत परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय अस्मिता की चेतना का निरंतर पोषण करती है।
- भारत की एकता और अखंडता हेतु प्रयास – पूर्वोत्तर राज्यों में SEIL जैसे कार्यक्रमों से लेकर कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने तक, परिषद का राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण योगदान स्मरणीय है।
आंदोलनों और जागरण की सतत साधना
- 1974 का जेपी आंदोलन: छात्र चेतना की ऐतिहासिक परिणति
- “शिक्षा बचाओ आंदोलन” (1991) और “शिक्षा परिवर्तन एवं रोजगार” आंदोलन (2002): शिक्षा के प्रति जन-जागरण
- अवैध घुसपैठ के विरोध में असम में आंदोलन, भ्रष्टाचार विरोध और परिसर संस्कृति का निर्माण भी ABVP के प्रमुख अभियान रहे हैं।
शिक्षकों और छात्रों का सहकार्य
परिषद एकमात्र ऐसा छात्र संगठन है जहाँ शिक्षक और छात्र साथ मिलकर काम करते हैं, जिससे गुरुकुल परंपरा की अनुशासित और नैतिक शिक्षा प्रणाली पुनर्जीवित होती है। परिषद न केवल नेतृत्व और वक्तृत्व का प्रशिक्षण देती है, बल्कि पत्रकार, अधिवक्ता, डॉक्टर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य पेशेवरों के बौद्धिक विकास में भी भूमिका निभाती है।
“ज्ञान, शील, एकता” को मूल मंत्र मानकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पिछले 75 वर्षों से राष्ट्र के लिए ऐसे युवा तैयार कर रही है, जो चरित्रवान, आत्मनिर्भर, जागरूक और समर्पित नागरिक बनें। यह केवल एक छात्र संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सतत साधना है। इसीलिए ABVP आज भारत का परम स्थाई और अत्यावश्यक संगठन बन चुका है।