महाराष्ट्र के नागपुर जिले के वाड़ी थाना क्षेत्र की दवलामेठी स्थित म्हाडा कॉलोनी में एक बुजुर्ग दंपती की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। 77 वर्षीय रिटायर्ड रक्षा कर्मचारी गंगाधर भोंगड़े और उनकी 75 वर्षीय पत्नी कौशल्या अपने बंद घर में मृत पाए गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती जांच में पुलिस का मानना है कि गंगाधर भोंगड़े की मौत पहले हुई। आशंका है कि वे रसोई में फिसलकर गिर गए और उठ नहीं पाए। उनका मोबाइल भी उनके पास बंद अवस्था में मिला।
दूसरी ओर, उनकी पत्नी कौशल्या, जो लंबे समय से बीमार थीं और पूरी तरह अपने पति पर निर्भर थीं, कई दिनों तक बिना भोजन और पानी के घर में अकेली पड़ी रहीं। भीषण गर्मी, डिहाइड्रेशन और भूख के कारण आखिरकार उनकी भी मौत हो गई।
बताया गया है कि यह दंपती करीब 40 वर्षों से साथ रह रहा था। उनकी कोई संतान नहीं थी, हालांकि गंगाधर ने अपनी पत्नी की पहली शादी से हुए चार बच्चों को अपनाया था। वे वर्षों से अपनी बीमार पत्नी की देखभाल कर रहे थे।
इस घटना का खुलासा तब हुआ जब कौशल्या के दामाद मोहम्मद गौस उनसे मिलने घर पहुंचे। घर बंद था और अंदर से तेज दुर्गंध आ रही थी। इसके बाद पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया, जहां अंदर का दृश्य बेहद विचलित कर देने वाला था।
घर के बाहर 27, 28 और 29 मई के अखबार मिलने से अंदाजा लगाया जा रहा है कि घटना 26 मई की रात के आसपास शुरू हुई होगी। गंगाधर ने कुछ दिन पहले अपनी बेटी को तबीयत खराब होने की जानकारी भी दी थी और मदद की मांग की थी, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिल सकी।
पुलिस ने मामले में किसी तरह की साजिश, चोरी या लूटपाट से इनकार किया है। शुरुआती जांच में इसे एक दुखद लेकिन प्राकृतिक घटना माना जा रहा है। दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
यह घटना समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करती है—क्या हमारे बुजुर्ग सुरक्षित और देखभाल के दायरे में हैं? अकेलेपन और सहारे की कमी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, इसका यह एक दर्दनाक उदाहरण है।
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