छात्रा की मौत पर उबाल, CM और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग
ओडिशा के बालासोर जिले में फकीर मोहन (स्वायत्त) कॉलेज की एक छात्रा द्वारा आत्मदाह किए जाने और उसकी मौत के बाद राज्य में गुस्से का माहौल है। छात्रा की मौत के विरोध में बीजू जनता दल (BJD) ने बुधवार को बालासोर बंद का आह्वान किया है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह प्रदर्शन किए और टायर जलाकर विरोध जताया। एक बीजेडी कार्यकर्ता ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग इस विरोध में शामिल हो रहे हैं और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही मुख्यमंत्री मोहन माझी और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की गई है। यह बंद सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखा गया है।
दरअसल, कॉलेज के एक शिक्षक द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार हुई छात्रा ने न्याय न मिलने से आहत होकर शनिवार को खुद को आग लगा ली थी। वह 95 प्रतिशत तक झुलस गई थी और तीन दिन तक भुवनेश्वर स्थित एम्स अस्पताल में जिंदगी से जूझने के बाद सोमवार रात उसकी मौत हो गई। मृतका बीएड पाठ्यक्रम की द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। मामले में आरोपी शिक्षक समीर कुमार साहू और कॉलेज के प्राचार्य दिलीप घोष को गिरफ्तार किया जा चुका है।
#WATCH | Balasore, Odisha | A BJD worker says, "…People in large numbers are joining our protest…The victim should get justice. The Chief Minister and the state Health Minister should resign…We have called for the Balasore Bandh from 6 am to 2 pm…" https://t.co/GEz4BOydN7 pic.twitter.com/xdEf3A9Up1
— ANI (@ANI) July 16, 2025
इस घटना ने पूरे राज्य में आक्रोश फैला दिया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने 17 जुलाई को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया है, जिसे वाम दलों समेत आठ विपक्षी दलों का समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है।
मंगलवार को छात्रा का अंतिम संस्कार बालासोर जिले में उसके पैतृक गांव में किया गया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, भाजपा सांसद प्रताप सारंगी और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। नम आंखों से हजारों लोगों ने छात्रा को अंतिम विदाई दी। यह घटना ओडिशा में महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गहरे सवाल खड़े कर रही है।