भारत-चीन-ब्राजील को सेकेंडरी सैंक्शन का अल्टीमेटम
यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए अब वैश्विक दबाव बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे रुख के बाद NATO ने भी रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर रूस ने 50 दिनों के भीतर यूक्रेन के साथ शांति समझौता नहीं किया, तो उस पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। साथ ही जो देश रूस के साथ व्यापार जारी रखेंगे—विशेष रूप से भारत, चीन और ब्राजील—उन पर भी सेकेंडरी सैंक्शन और भारी शुल्क लगाए जाएंगे।
ट्रंप ने NATO के महासचिव मार्क रूट से मुलाकात में इस प्रस्ताव को साझा किया। मार्क रूट ने भी इस चेतावनी को दोहराते हुए कहा कि बीजिंग, दिल्ली और ब्रासीलिया को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा, अन्यथा ये प्रतिबंध उनके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। उन्होंने सभी देशों से अपील की कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को शांति वार्ता के लिए मनाएं।
भारत पर खास दबाव है, क्योंकि भारत ने अब तक अमेरिका की नाराज़गी के बावजूद रूस के साथ ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापार जारी रखा है। अगर सेकेंडरी सैंक्शन लागू हुए तो इससे भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश व्यापार को गंभीर झटका लग सकता है, खासकर तब जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत जारी है।
गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही ब्राज़ील, म्यांमार, बांग्लादेश और यूरोपीय संघ के कुछ देशों पर 20% से 50% तक टैरिफ लगाने की घोषणा कर चुका है, जो 1 अगस्त से लागू होंगे। भारत इस सूची से अभी बाहर है, लेकिन रूस के साथ उसके व्यापार के चलते वह भी खतरे के घेरे में आ सकता है।
इस बीच, रूस ने इन धमकियों को खारिज करते हुए कहा है कि वह पहले से ही कई प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और आगे भी वह किसी भी प्रकार की आर्थिक सख्ती से निपटने के लिए तैयार है। मंगलवार, 15 जुलाई को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि मॉस्को नए प्रतिबंधों से नहीं डरेगा।
हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति और व्यापार पर इस टैरिफ युद्ध का बड़ा असर देखने को मिल सकता है, और भारत के लिए रणनीतिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।