दिल्ली-एनसीआर में 10-15 साल पुराने वाहनों पर लगे प्रतिबंध को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि केवल उम्र के आधार पर गाड़ियों को सड़कों से हटाना समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में कोर्ट में एक एप्लिकेशन दाखिल की है और कोर्ट से अनुरोध किया है कि यह फैसला गाड़ियों की फिटनेस के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल उनकी उम्र के आधार पर। रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, लेकिन पिछली सरकारों की निष्क्रियता के कारण आज ऐसे हालात बने हैं कि कोर्ट को कड़ा आदेश देना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बुजुर्ग लोग या वे वाहन मालिक जिनकी गाड़ियां ठीक स्थिति में हैं और कम चलती हैं, उनके लिए यह फैसला अनुचित है। उन्होंने तर्क दिया कि अच्छी हालत में और फिटनेस पास कर चुकी गाड़ियों को सड़क से हटाना लोगों के साथ अन्याय है। रेखा गुप्ता ने कहा कि अगर केवल उम्र को आधार बनाया जाए, तो भविष्य में यह भी कहा जा सकता है कि लोग घरों से बाहर ही न निकलें।
#WATCH दिल्ली में पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की जनहित याचिका पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, "जनता का पक्ष रखना हमारा दायित्व है। पिछली सरकारों ने पर्यावरण पर कोई काम नहीं किया और जनता को मरने दिया। हम पर्यावरण पर पूरी तरह से सजग हैं… pic.twitter.com/wXChh1rMVH
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 26, 2025
दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर 2018 के उस आदेश पर दोबारा विचार करने की मांग की है, जिसमें डीजल के 10 और पेट्रोल के 15 साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया था। सरकार ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह केंद्र सरकार या वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को आदेश दे कि इन वाहनों पर प्रतिबंध को लेकर वैज्ञानिक और व्यापक अध्ययन कराया जाए, ताकि निष्पक्ष निर्णय लिया जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि BS-6 वाहन, BS-4 की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं और ऐसे वाहनों का सालाना माइलेज भी कम होता है, जिससे इनका कुल प्रदूषण में योगदान नगण्य होता है। यह प्रतिबंध सीधे तौर पर मध्यम वर्ग की आबादी को प्रभावित कर रहा है, जिनके वाहन कम इस्तेमाल होते हैं लेकिन फिर भी सड़कों से हटाए जा रहे हैं।