उत्तर भारत के कई हिस्सों में इस साल भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही मचाई है, जिनमें हिमाचल प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से एक है। इसी गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राज्य पहुंचे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने सबसे पहले मंडी और कुल्लू जिलों के बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और फिर कांगड़ा पहुंचे, जहां राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने उनका स्वागत किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल और कई विधायक भी इस दौरान मौजूद थे। पीएम मोदी ने मौके पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना के जवानों से मुलाकात की और उनके राहत व बचाव कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस कठिन घड़ी में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर हर प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
हवाई सर्वेक्षण के जरिए हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और लैंडस्लाइड की स्थिति का जायजा लिया। इस कठिन समय में हम प्रदेश के अपने भाई-बहनों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। इसके साथ ही प्रभावित लोगों की मदद के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। pic.twitter.com/PS0klVwo5c
— Narendra Modi (@narendramodi) September 9, 2025
प्रधानमंत्री मोदी ने हिमाचल प्रदेश के लिए 1500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की दूसरी किस्त अग्रिम रूप से जारी की जाएगी। साथ ही उन्होंने बहुआयामी राहत पैकेज का ऐलान किया, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण, राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़कों का जीर्णोद्धार, क्षतिग्रस्त स्कूलों का पुनर्निर्माण, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से त्वरित सहायता और किसानों को पशुधन के लिए मिनी किट प्रदान करना शामिल है। किसानों को अतिरिक्त सहायता देने की भी बात कही गई, खासकर उन किसानों के लिए जो बिजली कनेक्शन न होने के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। पीएम ने जोर देकर कहा कि घरों और स्कूलों की जियोटैगिंग की जाएगी, ताकि नुकसान का सटीक आकलन हो सके और समय पर राहत पहुंचाई जा सके। शिक्षा को निर्बाध बनाए रखने के लिए स्कूलों को भी नुकसान दर्ज कर जियोटैग करने की सुविधा मिलेगी, जिससे ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत उन्हें शीघ्र मदद मिल सके।
आज धर्मशाला में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने आए प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का स्वागत किया।
आपदा की इस कठिन घड़ी में प्रधानमंत्री जी के हिमाचल आगमन से सभी को बहुत अपेक्षाएँ हैं। मुझे उम्मीद है कि वे प्रभावित परिवारों के हित में ज़रूर निर्णय लेंगे। pic.twitter.com/yI7HWjfWmr
— Sukhvinder Singh Sukhu (@SukhuSukhvinder) September 9, 2025
पीएम मोदी ने आपदा से प्रभावित परिवारों से भी मुलाकात की और शोक संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के साथ मिलकर दीर्घकालिक समाधान पर भी काम करेगी, जिसमें जल संचयन के लिए पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण, वर्षा जल संग्रहण और बेहतर जल प्रबंधन को बढ़ावा देना शामिल है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी टीम को हिमाचल भेजा है, जो विस्तृत नुकसान का आकलन करेगी और उसी आधार पर अतिरिक्त सहायता जारी की जाएगी।
#WATCH | PM Narendra Modi interacts with NDRF and SDRF personnel as he assesses the flood situation in Himachal Pradesh.
(Video: ANI/DD News) pic.twitter.com/scs2OTaEzp
— ANI (@ANI) September 9, 2025
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश को 20 जून से 8 सितंबर तक की अवधि में 4,122 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन से 370 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 205 मौतें सीधे बारिश से जुड़ी घटनाओं में हुई हैं। इनमें 43 लोग भूस्खलन, 17 बादल फटने और 9 अचानक आई बाढ़ की वजह से मारे गए हैं। इसके अलावा, 165 लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा चुके हैं और 41 अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हिमाचल की धरती पर आपदा से हुई बर्बादी का जायज़ा लेने आ रहे हैं। उनका हिमाचल की इस पावन धरती पर हार्दिक स्वागत है।
प्रधानमंत्री देश के लिए अभिभावक के समान होते हैं। हमारी सुंदर धरती आज भयंकर पीड़ा से गुज़र रही है- घर उजड़ गए हैं, अपनों को खोने का…
— Sukhvinder Singh Sukhu (@SukhuSukhvinder) September 9, 2025
पीएम के दौरे से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री से वन संरक्षण अधिनियम में छूट देने की मांग करेंगे, ताकि आपदा से बेघर और भूमिहीन हुए लोगों को वन भूमि आवंटित की जा सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हिमाचल इस वक्त अपने प्रियजनों को खोने, गांवों के मलबे में दबने और आधारभूत ढांचे के भारी नुकसान का दर्द झेल रहा है। सुक्खू ने यह भी कहा कि वह प्रधानमंत्री से यह सवाल भी करेंगे कि क्या पहाड़ी राज्यों में अपनाया जा रहा मौजूदा विकास मॉडल टिकाऊ है या नहीं, और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से पहाड़ों को कैसे बचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार राज्य की हर जरूरत में साथ खड़ी रहेगी और हर संभव मदद जारी रखेगी।
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