नेपाल इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। इन प्रदर्शनों में अब तक 22 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। हालात बिगड़ने के चलते प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था की कमान नेपाली सेना ने अपने हाथों में ले ली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलवार रात 10 बजे से नेपाली सेना ने पूरे देश की सुरक्षा का जिम्मा संभाल लिया। सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगडेल ने राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रदर्शनकारियों से बातचीत के लिए आगे आने की अपील की। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर हिंसा, लूटपाट और आगजनी बंद नहीं हुई, तो सेना कठोर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। उनका कहना था कि कुछ असामाजिक तत्व इस आंदोलन का गलत फायदा उठाकर नागरिकों और राष्ट्रीय धरोहरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक पशुपतिनाथ मंदिर पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन सेना की तैनाती से स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।
नेपाल में चल रहे आंदोलन ने अब एक बेहद चिंताजनक रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारियों को सत्ता से दिक्कत थी, तो फिर विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर का गेट तोड़ने का प्रयास क्यों किया गया।
यह केवल विरोध नहीं, बल्कि हमारी आस्था पर सीधा हमला है। मंदिर वह स्थान है जहाँ करोड़ों श्रद्धालु माथा… pic.twitter.com/6e8U1ZV4hH
— Adv Aditya Anand (@_SanataniAditya) September 10, 2025
नेपाल की इस बिगड़ती स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएँ आई हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि नेपाल में हुई हिंसा बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि युवाओं की मौत से उन्हें गहरी पीड़ा हुई है और भारत, नेपाल की शांति, स्थिरता और समृद्धि को बहुत महत्व देता है। मोदी ने सभी नेपाली नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की।
आज हिमाचल प्रदेश और पंजाब के दौरे से लौटने के बाद Cabinet Committee on Security की बैठक में नेपाल के घटनाक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। नेपाल में हुई हिंसा हृदयविदारक है। यह जानकर बहुत पीड़ा हुई कि इसमें अनेक युवाओं की जान गई है। नेपाल की स्थिरता, शांति और समृद्धि हमारे लिए…
— Narendra Modi (@narendramodi) September 9, 2025
वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी गहरी चिंता जताई और अधिकारियों से संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इसमें जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा का सम्मान होना चाहिए।
I'm closely following the situation in Nepal & I'm deeply saddened by the loss of life.
I urge a thorough investigation, restraint to avoid further escalation of violence & dialogue towards forging a constructive path forward.
I call on the authorities to comply with human…
— António Guterres (@antonioguterres) September 9, 2025
बताया जा रहा है कि इन प्रदर्शनों की शुरुआत ‘स्टूडेंट्स फॉर जस्टिस’ नामक छात्र संगठन ने की थी। देखते ही देखते आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया और प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास और कई राजनेताओं के घरों में आगजनी कर दी। सेना के हस्तक्षेप के बावजूद कई जगहों पर तनाव अभी भी बना हुआ है। नेपाल के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि देश को राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक अशांति दोनों का सामना करना पड़ रहा है।