उत्तर प्रदेश के मेरठ में विवादित अब्दुल्ला रेजीडेंसी पर मंगलवार को प्रशासन ने कार्रवाई की। हिंदू धर्म के लोगों की एंट्री पर प्रतिबंध की खबरों के बाद यह कॉलोनी चर्चा में आई थी। इसके बाद ऊर्जा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर ने इस कॉलोनी के निर्माण की जाँच की माँग करते हुए मेरठ के जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। इसी कड़ी में प्रशासन ने अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया।
"NO हिंदू" कालोनी पर बुलडोजर!#मेरठ की अब्दुल्ला रेजीडेंसी में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया है. जांच कमेटी की पैमाइश में खुलासा होने के बाद रेजीडेंसी की वाउन्ड्रीवाल पर बुलडोजर चला है. बिल्डरों पर केस भी दर्ज हुआ है
UP सरकार के मंत्री सोमेन्द्र तोमर ने रेजीडेंसी पर कई… pic.twitter.com/MKNxMNKvW8
— Narendra Pratap (@hindipatrakar) September 10, 2025
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच में पाया गया कि कॉलोनी में करीब 300 मीटर जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था। कॉलोनी के लिए 22,000 वर्ग मीटर का ही मानचित्र स्वीकृत था, लेकिन बिल्डर ने अतिरिक्त 300 मीटर जमीन पर बाउंड्रीवॉल बना ली थी। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर डॉ. दीक्षा जोशी की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय समिति ने जाँच की और अवैध हिस्से को ध्वस्त कर दिया। इस समिति में सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी और आवास विकास परिषद के एसई राजीव कुमार भी शामिल थे।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस कॉलोनी का निर्माण जेल में बंद गैंगस्टर शारिक की जमीन पर हुआ था। कॉलोनी में एक मस्जिद भी बनाई गई थी, जिसकी वैधता पर सवाल खड़े किए गए हैं। मंत्री सोमेंद्र तोमर ने कहा कि अब्दुल्ला रेजीडेंसी पिछले 10 सालों से विकसित की जा रही है और इसे धार्मिक आधार पर बाँटने की योजना के तहत तैयार किया गया। उन्होंने साफ किया कि धार्मिक आधार पर लोगों को अलग करने की कोशिश किसी भी हाल में सफल नहीं होगी।
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि कॉलोनी में कुल 75 प्लॉट हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय को बेचे गए हैं, जबकि हिंदुओं के पास केवल 4 प्लॉट हैं। प्रोजेक्ट के दो पार्टनर मेजर जनरल जावेद इकबाल और महेंद्र गुप्ता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने फिलहाल पूरे मामले की जाँच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। इस कार्रवाई के बाद कॉलोनी को लेकर चल रही विवादास्पद चर्चा और भी तेज हो गई है।