भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने जम्मू-कश्मीर की 4 और पंजाब की 1 राज्यसभा सीटों को भरने के लिए चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा कर दी है। आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन पांचों सीटों पर मतदान 24 अक्टूबर 2025 को होगा और परिणाम उसी दिन शाम को घोषित कर दिए जाएंगे। इन चुनावों के लिए 6 अक्टूबर 2025 को अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 6 अक्टूबर से शुरू होगी और 13 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत नामांकन पत्रों की विधिवत जांच 14 अक्टूबर को की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी दस्तावेज, पात्रता और औपचारिकताएं चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप हैं। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर तय की गई है। चुनाव के दिन मतदान प्रक्रिया सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी। मतदान संपन्न होने के बाद उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना आरंभ की जाएगी और कुछ ही घंटों में नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।
निर्वाचन आयोग ने इन चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक पुनर्गठन से जुड़े प्रावधानों के अनुसार होगी। 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर (विधानसभा सहित) और लद्दाख (विधानसभा रहित)—में विभाजित कर दिया गया था। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत, जम्मू-कश्मीर को राज्यसभा में चार सीटें आवंटित की गई थीं। पहले यह सीटें जम्मू-कश्मीर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों के पास थीं, लेकिन उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद ये सीटें रिक्त हो गईं। उस समय केंद्र शासित प्रदेश में निर्वाचक मंडल (विधानसभा) का गठन नहीं हुआ था, जिसकी अनुपस्थिति में चुनाव कराना संभव नहीं था। अब जम्मू-कश्मीर में हाल ही में विधानसभा के गठन के बाद निर्वाचक मंडल उपलब्ध है, जिससे इन चार रिक्त सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव कराना संभव हो गया है।
पंजाब की राज्यसभा की एक सीट भी इसी कार्यक्रम के अंतर्गत भरी जाएगी, जिसके लिए चुनाव की प्रक्रिया और समयसीमा जम्मू-कश्मीर की चारों सीटों के समान रहेगी। निर्वाचन आयोग ने कहा कि यह चुनावी प्रक्रिया पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरी की जाएगी, ताकि जम्मू-कश्मीर के लोगों को राष्ट्रीय संसद के उच्च सदन में उनका संवैधानिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
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