हमास के मिलिट्री विंग अल-क़स्साम ब्रिगेड्स ने 13 अक्टूबर 2023 को जिन चार मृत बंधकों (होस्टेज) के नाम जारी किए, उनमें एकमात्र हिंदू छात्र बिपिन जोशी का नाम भी शामिल था। बिपिन जोशी नेपाल के रहने वाले थे और इजरायल में कृषि (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई कर रहे थे। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकी हमले के दौरान उन्हें किडनैप कर लिया गया, और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। बताया गया कि बिपिन जोशी ही अकेले हिंदू थे जिन्हें हमास ने बंधक बनाया था। हमास ने कहा था कि वह इन चारों मृत बंधकों के शव जल्द ही सौंप देगा। बिपिन के अलावा बाकी तीन बंधक गाय इलौज, योसी शराबी और डैनियल पेरेत्ज़ थे, जिनकी हत्या के बाद शवों को बंधक बनाकर रखा गया था।
Bipin Joshi's family struggled so hard to get their son back.
He arrived in Israel 25 days before the massacre. The 23-year-old Hindu student from Nepal just wanted to study agriculture.
He wasn't Israeli. He wasn't Jewish. So the media won't talk about him because that will… pic.twitter.com/2QrwLfLG8Q
— dahlia kurtz ✡︎ דליה קורץ (@DahliaKurtz) October 13, 2025
कौन थे बिपिन जोशी?
बिपिन जोशी नेपाल के निवासी और 22 वर्ष के युवा कृषि छात्र थे। वे एक विशेष शैक्षणिक प्रोग्राम के तहत नेपाल से इजरायल आए थे, जहाँ वे खेती-बाड़ी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। वे किबुत्ज अलुमिम नामक एक फार्म में काम कर रहे थे, जो गाजा सीमा के पास स्थित है। बिपिन हमले से लगभग एक महीने पहले ही इजरायल पहुँचे थे। जब 7 अक्टूबर को हमला हुआ, तो वे एक बम शेल्टर में छिपे हुए थे। बताया जाता है कि उन्होंने वहाँ मौजूद अन्य लोगों की जान बचाने के लिए एक ग्रेनेड को बाहर फेंक दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और फिर हमास के आतंकियों ने उन्हें पकड़ लिया।
कैद के दौरान बिपिन की स्थिति
बिपिन जोशी के परिवार ने नवंबर 2023 में उनकी कैद के दौरान की एक वीडियो फुटेज जारी की थी। इसमें वह थके और डरे हुए दिख रहे थे, लेकिन फिर भी हिम्मत बनाए रखने की कोशिश कर रहे थे। यह वीडियो दुनिया को उनके संघर्ष और साहस की झलक दिखाती है। हमास ने 13 अक्टूबर को 20 बंधकों को रेड क्रॉस के हवाले किया था, जिनमें बिपिन जोशी का नाम भी था। हालाँकि, उस समय तक वे गंभीर रूप से घायल थे और बाद में उनका दुखद निधन हो गया। उनके परिवार को केवल उनके शव की वापसी का इंतजार रह गया।
बिपिन जोशी न तो इजरायली थे, न ही यहूदी — वे एक सामान्य हिंदू छात्र थे जो सिर्फ पढ़ाई के लिए इजरायल गए थे। शायद इसी वजह से उनकी किडनैपिंग और शहादत की कहानी मुख्यधारा की अंतरराष्ट्रीय मीडिया में वह जगह नहीं पा सकी, जिसकी वह हकदार थी। बिपिन जोशी ने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाया, लेकिन उनकी बहादुरी और बलिदान की कहानी दुनिया से लगभग अनजान रह गई। वे एक गुमनाम हीरो बन गए — जिन्होंने इंसानियत के लिए अपनी जान दे दी, पर जिन्हें वह सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था।