आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने संयुक्त राष्ट्र सैन्य योगदान देने वाले देशों (यूएनटीसीसी) के प्रमुखों के सम्मेलन में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत 1950 से संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों में सक्रिय योगदान दे रहा है। हालांकि, अब युद्ध का स्वरूप बदल गया है और ऐसे में शांति बनाए रखने की चुनौतियाँ भी नई दिशा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुरूप सेनाएँ जब मिलकर काम करती हैं, तो एकजुटता की वास्तविक ताकत दिखाई देती है। जनरल द्विवेदी ने बताया कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में 11 कॉन्फ्लिक्ट जोन में से 9 में भारतीय सेना अपनी भूमिका निभा रही है, जो भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यूएन पीस कंट्रीब्यूशन कंट्रीज के कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए दिल्ली स्थित मानिक शॉ सेंटर में आर्मी चीफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने भारतीय सेना के योगदान का उल्लेख किया और बताया की भारत 1950 से पीस मिशन में अपनी भूमिका निभा रहा है। करेंट ग्लोबल सिनेरियो में भी 11 कॉन्फ्लिक्ट जोन… pic.twitter.com/fn0ayi5Bo0
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) October 14, 2025
आर्मी चीफ ने कहा कि पूरा विश्व एक परिवार की तरह है और शांति बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों, जिन्हें “ब्लू हैल्मेट्स” कहा जाता है, की भूमिका को अहम बताया। उन्होंने कहा कि टकराव की स्थिति में सुलह और संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि स्थायी शांति स्थापित की जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दौर में आर्थिक सहयोग में कमी देखी जा रही है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है। हमें ऐसा ढांचा तैयार करने की जरूरत है जो मजबूत हो और भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके।
जनरल द्विवेदी ने यह भी कहा कि सैन्य संचालन में उन्नत तकनीक का समावेश, तुरंत तैनाती क्षमताओं का विकास, और योगदान देने वाले देशों के बीच बेहतर तालमेल समय की मांग है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमें मिलकर ऐसा ढांचा बनाना होगा जो मजबूत और उत्तरदायी (resilient and accountable) दोनों हो। अंत में उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र का नैतिक अधिकार मानवीय संबंधों और सहयोग की भावना पर आधारित है, और इसी आधार पर वैश्विक शांति को स्थायी बनाया जा सकता है।