गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर रविवार, 9 नवंबर 2025 को अहमदाबाद में एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया। इस संयुक्त अभियान के दौरान ISIS से जुड़े तीन आतंकियों — आजाद सुलेमान शेख, मोहम्मद सुहैल और अहमद मोहिउद्दीन सैयद — को गिरफ्तार किया गया। जांच में यह खुलासा हुआ है कि ये आतंकी न केवल गुजरात, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी बड़े आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे। विशेष रूप से, उन्होंने लखनऊ स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय और दिल्ली की आजादपुर मंडी की रेकी (जासूसी सर्वेक्षण) की थी। दोनों स्थानों को संभावित आतंकी हमलों के लक्ष्य के रूप में चुना गया था।
जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए। पता चला कि आजाद शेख और मोहम्मद सुहैल ने राजस्थान के हनुमानगढ़ से हथियारों की एक खेप जुटाई थी और उन्हें गांधीनगर के एक कब्रिस्तान में छिपाकर रखा था। वहीं, हैदराबाद निवासी डॉ. अहमद मोहिउद्दीन सैयद को ये हथियार लेकर लौटना था, लेकिन गुजरात ATS ने समय रहते 7 नवंबर की रात उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उसके पास से चार विदेशी पिस्तौल, 30 कारतूस और करीब 40 लीटर कैस्टर ऑयल बरामद हुआ, जिसे रासायनिक हथियार या विस्फोटक तैयार करने में इस्तेमाल किया जा सकता था।
मोहिउद्दीन के मोबाइल की जांच में उसके अन्य साथियों के संपर्क, ISIS मॉड्यूल की गतिविधियों, और भारत विरोधी षड्यंत्रों के सबूत मिले। इसके बाद ATS ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल को भी धर दबोचा।
गुजरात ATS के DIG सुनील जोशी के अनुसार, डॉ. मोहिउद्दीन सैयद ने चीन से MBBS की पढ़ाई की थी और वह ISIS-खुरासान प्रांत (ISIS-K) के एक सक्रिय सदस्य अबू खादिम के संपर्क में था। अबू खादिम ने उसे भारत में फंड जुटाने, भर्ती अभियान चलाने और रासायनिक हमलों की तैयारी का जिम्मा दिया था। जांच में यह भी सामने आया है कि मोहिउद्दीन साइनाइड जैसे रसायनों से जहरीला पदार्थ तैयार करने की कोशिश कर रहा था, जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर जनहानि पहुंचाने के लिए किया जा सकता था।
ATS फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि आतंकियों को हथियारों और केमिकल की सप्लाई कहाँ से मिली और इस नेटवर्क से जुड़े स्लीपर सेल किन-किन राज्यों में सक्रिय हैं। तीनों गिरफ्तार आतंकियों से गहन पूछताछ जारी है। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि आतंकियों का लक्ष्य देश के संवेदनशील धार्मिक और आर्थिक केंद्रों को निशाना बनाना था।
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