कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फिर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है, और इस बार उनका फोकस मोदी के विकास-दृष्टिकोण और सांस्कृतिक मिशन पर रहा है — एक ऐसा दृष्टिकोण जो पारंपरिक आर्थिक विकास से आगे बढ़कर भारत को “उभरता हुआ मॉडल” बनाने की कल्पना करता है।
थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने एक पोस्ट में बताया कि उन्हें दिल्ली में एक निजी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जहां प्रधानमंत्री ने भाषण देते हुए कहा कि भारत में विकास की “रचनात्मक अधीरता” और “उत्तर-औपनिवेशिक मानसिकता” को पूरी ताकत से समर्थन दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह बात भी कही कि मोदी अब सिर्फ एक उभरता हुआ बाजार नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे देश के नेता हैं जो दुनिया को विकास के एक नए मॉडल के रूप में प्रेरित कर सकते हैं।
Attended PM @narendramodi’s #RamnathGoenkaLecture at the invitation of @IndianExpress last night. He spoke of India's "constructive impatience" for development and strongly pushed for a post-colonial mindset.
The PM emphasized that India is no longer just an 'emerging market'… pic.twitter.com/97HwGgQ67N
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) November 18, 2025
उनके मुताबिक, पीएम मोदी ने स्वीकार किया कि उन पर अक्सर “चुनावी मोड” में रहने का आरोप लगता है, लेकिन असलियत में वे “भावनात्मक मोड” में काम करते हैं — यानी वे लोगों की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की बात करते हैं। थरूर ने खासकर पीएम के उस वक्तव्य की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने इंडिया में शिक्षा पर उपनिवेशवाद के लंबे समय से चले आ रहे असर की बात की और यह कहा कि इसे पलटना ज़रूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में मेकाले की 200 साल पुरानी गुलामी मानसिकता की विरासत को चुनौती देने का आह्वान किया और भारत की अपनी भाषाओं, उसकी सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान प्रणालियों पर गर्व करने की ज़रूरत बताई। उन्होंने इसके लिए एक 10 साल का राष्ट्रीय मिशन प्रस्तावित किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत अपनी अवधारणाओं और मूल्यों को पुनर्जीवित करे। थरूर ने कहा कि मोदी का यह भाषण सिर्फ आर्थिक प्रगति की बात नहीं करता, बल्कि एक सांस्कृतिक पुकार भी है — राष्ट्र को बेचैन और प्रेरित रहने के लिए, ताकि वह न सिर्फ बढ़े, बल्कि अलग और विशिष्ट बने।
थरूर ने यह भी उल्लेख किया कि भाषण के दौरान उनकी खुद की तबियत ठीक नहीं थी — उन्हें ज़ुकाम और सर्दी थी — लेकिन उन्होंने दर्शकों के बीच बने रहने की खुशी जताई, क्योंकि उन्हें यह संदेश इतना महत्वपूर्ण लगा कि उन्होंने अपनी असुविधा को पीछे रखते हुए वहां बने रहने का निर्णय लिया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब थरूर और कांग्रेस के बीच रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। पिछले कुछ महीनों में यह मतभेद गहराए हैं, खासकर जब थरूर को 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद विपक्षी नेता के रूप में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल में भेजा गया था। थरूर ने अमेरिका समेत चार अन्य देशों का दौरा किया, और “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद प्रधानमंत्री की ऊर्जा, गतिशीलता और वैश्विक जुड़ाव की इच्छा की सार्वजनिक सराहना की, जिसे लेकर उनकी अपनी पार्टी के साथ खिंचाव और बढ़ गया।
इस पूरी स्थिति में, थरूर की यह तारीफ न सिर्फ मोदी के व्यक्तित्व और उनकी दूरदृष्टि की मान्यता है, बल्कि एक संकेत भी हो सकती है कि वे कांग्रेस के अंदरूनी राजनीति और उसकी वर्तमान सोच से अलग रुख अपना रहे हैं।
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