भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देश की कई खाद्य कंपनियों और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई भ्रामक ब्रांड नामों, ट्रेड नामों और उत्पादों पर किए जा रहे ऐसे दावों को लेकर की गई है, जो उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता, पोषण मूल्य या स्वास्थ्य लाभ के बारे में गलत धारणा दे सकते हैं।
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, पैकेजिंग और विज्ञापन से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन किया जाना आवश्यक है। संस्था का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी खाद्य उत्पाद के बारे में सही और पारदर्शी जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे तथ्यात्मक आधार पर निर्णय ले सकें। यदि कोई कंपनी ऐसे शब्दों या दावों का उपयोग करती है जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं, तो उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
‘Healthy’, ‘Organic’ और ‘Zero Maida’ जैसे दावों पर आपत्ति
FSSAI ने एक दर्जन से अधिक उत्पादों और ब्रांड नामों पर आपत्ति जताई है। नियामक संस्था के अनुसार, ‘Healthy’, ‘Organic’, ‘Zero Maida’ और इसी तरह के कई शब्द उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिला सकते हैं कि उत्पाद अन्य विकल्पों की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक या पोषणयुक्त है, जबकि ऐसे दावों के समर्थन में आवश्यक प्रमाण या नियामकीय स्वीकृति मौजूद नहीं हो सकती।
नोटिस प्राप्त करने वाले उत्पादों में The Health Factory के ‘Zero Maida Whole Wheat Bread’ और ‘Zero Maida Pizza Base’ जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा TruVy ब्रांड के कई स्नैक उत्पादों में ‘Healthy’ शब्द के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। FSSAI का कहना है कि इस प्रकार के दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं और उत्पाद के वास्तविक पोषण मूल्य के बारे में गलत संदेश दे सकते हैं।
FSSAI has issued notices to several food business operators (FBOs) for violating provisions of the FSS Act, 2006 regarding misleading brand names, trade names, and product claims… (1)2 pic.twitter.com/CgSVspoQxS
— FSSAI (@fssaiindia) June 14, 2026
‘True Vitamin’ जैसे शब्दों पर भी सख्ती
FSSAI ने Newherbs True Vitamin नामक उत्पाद को भी नोटिस जारी किया है। संस्था के अनुसार, ‘True Vitamin’ जैसी शब्दावली मौजूदा खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियमों में परिभाषित या मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में इस प्रकार के दावों का उपयोग उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिला सकता है कि उत्पाद में कोई विशेष या अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मौजूद है, जबकि इसकी पुष्टि नियामकीय मानकों के अनुसार नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े दावे उपभोक्ताओं के खरीद निर्णय को सीधे प्रभावित करते हैं, इसलिए ऐसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर नियामक संस्थाएं लगातार निगरानी रख रही हैं।
ऑर्गेनिक और वीगन दावों पर भी निगरानी
FSSAI ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी उत्पाद तब तक स्वयं को ‘Organic’ या ‘Vegan’ नहीं बता सकता, जब तक उसके पास आवश्यक प्रमाणन और अनुमोदन उपलब्ध न हों। संस्था ने कहा कि कई मामलों में कंपनियां विपणन (मार्केटिंग) के उद्देश्य से ऐसे शब्दों का उपयोग करती हैं, जिससे उपभोक्ताओं के बीच उत्पाद को लेकर विशेष छवि बनती है।
नियामक ने चेतावनी दी है कि बिना वैध प्रमाणन के ऑर्गेनिक या वीगन होने का दावा करना खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ता हितों की सुरक्षा पर जोर
FSSAI ने कहा कि खाद्य उद्योग में पारदर्शिता और उपभोक्ता विश्वास बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। संस्था ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे पैकेजिंग, विज्ञापन और ब्रांडिंग के दौरान केवल वही दावे करें जो वैज्ञानिक तथ्यों और कानूनी मानकों पर आधारित हों।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद खाद्य उद्योग में लेबलिंग और मार्केटिंग से जुड़े नियमों का पालन और अधिक सख्ती से किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को उत्पादों के बारे में अधिक स्पष्ट और सटीक जानकारी मिल सकेगी तथा भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगेगा।
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