जवानों ने ड्रोन गिराए, उपकरणों की सुरक्षा की और गोलाबारी के बीच करीब 250 नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया। भारत की ओर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही पाकिस्तान ने LoC के पास उरी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को निशाना बनाने की कोशिश की थी, लेकिन CISF ने इस हमले को पूरी तरह नाकाम कर दिया। मंगलवार को CISF ने बताया कि हमले के दौरान भारी गोलीबारी के बावजूद दुश्मन के ड्रोन नष्ट कर दिए गए थे। उरी हाइड्रो पावर प्लांट जम्मू-कश्मीर में LoC से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी संघर्ष में असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए CISF ने अपने 19 जवानों को डायरेक्टर जनरल की डिस्क से सम्मानित किया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय सेना द्वारा 6-7 मई की रात चलाया गया था, जिसमें LoC के पार मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी से LoC के पास महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और रिहायशी इलाकों को खतरा पैदा हो गया। NHPC द्वारा संचालित उरी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर भी बड़ा खतरा मंडराया। CISF के मुताबिक, उनकी यूनिट्स LoC से महज 8-10 किलोमीटर की दूरी पर थीं, इसलिए अचानक बढ़े तनाव के समय वे सबसे अधिक जोखिम में थीं। भारी फायरिंग के बावजूद जवानों ने अद्भुत शांति और प्रोफेशनलिज्म का परिचय दिया।
CISF Personnel Honoured With The DG’s Disc For Exceptional Bravery During Operation Sindoor
Amid intense cross-border shelling in May 2025, CISF teams at Uri Hydro Electric Projects displayed extraordinary courage, safeguarding vital national assets and evacuating 250 civilians… pic.twitter.com/NPd0KkHaVp
— CISF (@CISFHQrs) November 25, 2025
कमांडेंट रवि यादव की अगुवाई में डिप्टी कमांडेंट मनोहर सिंह और असिस्टेंट कमांडेंट सुभाष कुमार सहित टीमों ने इंस्टॉलेशन्स और आसपास के रिहायशी इलाकों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए। सम्मानित जवानों में यूएचईपी उरी-I और उरी-II दोनों इकाइयों के सदस्य शामिल हैं। उरी-I से कमांडेंट रवि यादव, कांस्टेबल सुशील वसंत कांबले, रजिक अहमद अब्दुल रफीक, वानखेड़े रविंद्र गुलाब, त्रिदेव चकमा, इंस्पेक्टर दीपक कुमार झा और हेड कांस्टेबल गुरजीत सिंह को सम्मानित किया गया। उरी-II से मनोहर सिंह, सुभाष कुमार, सोहन लाल, मुफीद अहमद और महेश कुमार को सम्मान मिला।
यूएचईपी उरी-I के हेड कांस्टेबल मनोज कुमार शर्मा और राम लाल भी इस टीम का हिस्सा रहे। वहीं उरी-II से सब-इंस्पेक्टर अनिल कुमार और दीपक कुमार, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर राजीव कुमार और सुखदेव सिंह, तथा कांस्टेबल संदेनाबोइना राजू को भी सम्मानों की सूची में शामिल किया गया। CISF के अनुसार, इन जवानों ने लगातार गिर रही गोलियों की ट्रैजेक्टरी का रियल-टाइम विश्लेषण किया, सुरक्षित क्षेत्र पहचाने और लोगों को बंकर शेल्टर्स तक पहुँचाने की व्यवस्था की। गोलाबारी जैसे ही रिहायशी इलाकों के करीब आई, जवान घर-घर जाकर महिलाओं, बच्चों, NHPC स्टाफ और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले गए। समय रहते की गई इस बहादुर कार्रवाई से करीब 250 नागरिकों की जान बचाई जा सकी।
CISF के बयान में यह भी बताया गया कि बेहद खतरनाक हालात के बावजूद जवानों ने प्रतिष्ठानों पर हमला करने की कोशिश कर रहे दुश्मन ड्रोन्स को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया। साथ ही हथियारों और अन्य संवेदनशील सामग्री को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाकर नुकसान से बचाया गया।
गौरतलब है कि CISF की स्थापना 10 मार्च 1969 को हुई थी। यह बल देश के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों, इन्फ्रास्ट्रक्चर, दिल्ली मेट्रो, एयरपोर्ट्स, ताज महल और लाल किला जैसे ऐतिहासिक स्मारकों, संवेदनशील सरकारी भवनों, एटॉमिक पावर प्लांट्स, स्पेस एस्टेब्लिशमेंट्स, रक्षा उत्पादन इकाइयों, ऑयल रिफाइनरीज, गैस इंस्टॉलेशन्स, पोर्ट्स, बड़े शिपयार्ड्स और पावर प्लांट्स की सुरक्षा करता है।
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