फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल के दो और ठिकानों का पता चला है। जांच में सामने आया कि उसने एक पूर्व सरपंच से तीन बेडरूम वाला मकान किराये पर ले रखा था। यह कमरा उसने कश्मीरी फल रखने के नाम पर लिया था और कई बार डॉ. शाहीन के साथ वहाँ आता-जाता था। इसके अलावा खुलासा हुआ कि उसने कुछ समय तक यूनिवर्सिटी से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित खेत में विस्फोटक पदार्थ छिपाकर रखा था। यह जानकारी दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दी है।
जांच के अनुसार, गिरफ्तार सर्जन डॉ. मुजम्मिल शकील ने फरीदाबाद के फतेहपुर तगा, धौज और खोरी जमालपुर गांव में किराये पर ठिकाने बना रखे थे। खोरी जमालपुर में उसने पूर्व सरपंच जुम्मा का मकान यह कहकर किराये पर लिया था कि वह कश्मीरी फलों का कारोबार करना चाहता है। मुजम्मिल यहाँ कई बार डॉ. शाहीन सईद के साथ आया और करीब ढाई महीने बाद गर्मी अधिक होने का हवाला देकर मकान खाली कर दिया।
NIA जांच में सामने आया कि अमोनियम नाइट्रेट से भरे कट्टों को फतेहपुर तगा और धौज में ले जाने से पहले अल फलाह यूनिवर्सिटी से सटे खेतों में बने एक कमरे में करीब 12 दिनों तक छिपाकर रखा गया था। लगभग 2540 किलो विस्फोटक इसी कमरे में रखा रहा। चोरी या खुलासे के डर से बाद में इसे गांव फतेहपुर तगा में इमाम इश्तियाक के पुराने घर में शिफ्ट कर दिया गया। यही तैयार विस्फोटक दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया था। सोमवार रात NIA मुजम्मिल को निशानदेही के लिए मौके पर लेकर पहुँची, जहाँ पूर्व सरपंच जुम्मा ने उसे पहचान लिया।
जुम्मा ने बताया कि मकान 8,000 रुपये में किराये पर दिया गया था। अप्रैल से जुलाई 2025 तक यह मकान मुजम्मिल के कब्जे में रहा। जुम्मा की प्लास्टिक रॉ मटेरियल की फैक्ट्री के ऊपर बने इन कमरों में मुजम्मिल ने फल व्यापार का बहाना बनाया था। उसने कहा था कि कश्मीर से फल मंगाकर यहाँ बेचेगा। हालांकि, उसने तीन महीने बाद कमरा खाली कर दिया और कमरे में रखा गद्दा, कूलर और चादर तक साथ ले गया।
जुम्मा ने यह भी बताया कि उनकी मुलाकात मुजम्मिल से अल-फलाह अस्पताल में हुई थी, जब वे अपने भतीजे के इलाज के लिए गए थे। इसी दौरान उनकी पहचान डॉ. उमर नबी से भी हुई। भतीजे के इलाज के चलते उनके बीच संपर्क बढ़ा और धीरे-धीरे जान-पहचान मजबूत हो गई। भतीजे की मौत जुलाई में हुई थी। मुजम्मिल कई बार जुम्मा के ऑफिस भी आया था। मकान लेने के समय उसके साथ आई महिला को उसने परिवार की सदस्य बताया था, लेकिन जांच में पुष्टि हुई कि वह महिला डॉ. शाहीन सईद थी।
अल फलाह यूनिवर्सिटी के चारों ओर खेत हैं और इन्हीं खेतों में बने कमरों में विस्फोटक छिपाकर रखा गया था। यूनिवर्सिटी की मस्जिद के पास गाँव तगा के किसान बदरू की जमीन है। मुजम्मिल ने बदरू के खेत के कमरे में अमोनियम नाइट्रेट के कट्टे रखवाए थे। बदरू मस्जिद में नमाज़ पढ़ने आता था, वहीं उसकी मुलाकात मुजम्मिल से हुई, और इमाम इश्तियाक की मदद से मुजम्मिल ने उसे कुछ दिन के लिए सामान रखने के लिए मना लिया।
करीब 12 दिन तक विस्फोटक से भरे बोरे बदरू के खेत के कमरे में पड़े रहे। बाद में बदरू ने मुजम्मिल को चेताया कि सामान चोरी हो सकता है, इसलिए इसे हटाया जाए। इसके बाद मुजम्मिल ने पूरा सामान फतेहपुर तगा स्थित इमाम इश्तियाक के घर में शिफ्ट कर दिया, जहाँ से बाद में विस्फोटक दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ।
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