पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने के आरोप में गिरफ्तार आमीन को महत्वपूर्ण राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 152, जिसके तहत राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध कथन या संप्रभुता को खतरे में डालने के आरोप लगाए गए थे, उसकी वास्तविक लागू योग्यता का निर्णय ट्रायल के दौरान सबूतों, गवाहियों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा। जस्टिस राजेश भारद्वाज की एकल पीठ ने कहा कि इस शुरुआती चरण में आरोपों की सत्यता या गंभीरता पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है, क्योंकि यह अधिकार सिर्फ ट्रायल कोर्ट के क्षेत्राधिकार में आता है।
आमीन ने पंचकूला के पिंजौर थाने में दर्ज FIR नंबर 184/2025 से जुड़े मामले में नियमित जमानत याचिका दायर की थी। उस पर आरोप था कि उसने भारत-पाक तनाव की स्थिति के दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाया, जिससे कथित रूप से देशद्रोही और उत्तेजक माहौल पैदा हुआ। शिकायतकर्ता नितीश कुमार ने यह दावा किया था कि आमीन का यह कृत्य राष्ट्रविरोधी प्रकृति का है। इससे पहले अगस्त 2025 में सत्र अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद वह 10 मई 2025 से न्यायिक हिरासत में था।
हाई कोर्ट ने यह ध्यान में रखते हुए कि ट्रायल लंबा चल सकता है, आरोपी का लंबा कारावास बिना दोष सिद्ध हुए उचित नहीं माना, और प्रक्रिया के सिद्धांतों के अनुरूप उसे जमानत दे दी। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट सबूतों और गवाहियों के आधार पर यह तय करेगा कि क्या आरोपी का कथित कृत्य वास्तव में BNS की धारा 152 के दायरे में आता है या नहीं।
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