दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है। अदालत में दायर एक अर्जी में दावा किया गया है कि नई दिल्ली में 1980 की वोटर लिस्ट में उनका नाम जोड़ा गया था, जबकि 1982 में हटा दिया गया। यह नोटिस नागरिकता लेने से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के मामले से जुड़ा है। बता दें कि सोनिया गांधी और राजीव गांधी की शादी 25 फरवरी 1968 को हुई थी, जबकि दावा किया जा रहा है कि उन्होंने 1983 में भारतीय नागरिकता ली।
अर्जी में कहा गया है कि सोनिया गांधी का नाम नागरिक बनने से तीन साल पहले ही मतदाता सूची में जोड़ा गया था। इस मामले में दाखिल एक अर्जी को पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ यह रिवीजन पिटीशन दायर की गई। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने FIR दर्ज करने के आदेश देने से मना कर दिया था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि पहली बार नाम जोड़ते समय फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया होगा, क्योंकि सोनिया गांधी के पास उस समय भारतीय नागरिकता के दस्तावेज नहीं थे। वकील ने अदालत में कहा कि यह अपराध है और इसलिए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाना चाहिए।
स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने ने रिवीजन पिटीशन पर सीनियर एडवोकेट पवन नारंग की शुरुआती दलीलें सुनीं और सोनिया गांधी तथा दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी। अर्जी में जानकारी दी गई है कि 1980 में सोनिया गांधी का नाम सूची में जोड़ा गया, 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा शामिल किया गया।
इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने कहा था कि वह इस मामले में जांच शुरू नहीं कर सकता, क्योंकि नागरिकता के मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इलेक्टोरल रोल में नाम जोड़ने या हटाने की योग्यता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग का होता है।
अब अदालत ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है कि आखिर नागरिकता लिए बिना उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे जुड़ा। याचिका में यह भी कहा गया है कि 1980 में मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के समय सोनिया गांधी इटली की नागरिक थीं। 1980 में गांधी परिवार 1, सफदरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री निवास में रहता था।
Sonia Gandhi’s tryst with India’s voters’ list is riddled with glaring violations of electoral law. This perhaps explains Rahul Gandhi’s fondness for regularising ineligible and illegal voters, and his opposition to the Special Intensive Revision (SIR).
Her name first appeared… pic.twitter.com/upl1LM8Xhl
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 13, 2025
बीजेपी नेता अमित मालवीय का कहना है कि 1980 में संशोधित मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम मतदान केंद्र 145 पर क्रमांक 388 पर दर्ज किया गया, जबकि भारतीय नागरिकता होना इसे जोड़ने की अनिवार्य शर्त है। 1982 में विरोध के बाद उनका नाम हटाया गया, लेकिन 1983 में फिर से जोड़ा गया। इस बार भी प्रक्रिया पर सवाल उठे, क्योंकि उस समय पंजीकरण की अर्हता तिथि 1 जनवरी 1983 थी, जबकि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली।
मालवीय ने आरोप लगाया कि नागरिकता की शर्तें पूरी किए बिना 1980 और 1983 में दो बार उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चुनावी गड़बड़ी का मामला है।
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