केरल में स्थानीय निकाय चुनावों की मतगणना जारी है। राज्य के कुल 1,199 स्थानीय निकायों में 9 और 11 दिसंबर को दो चरणों में मतदान कराया गया था। हालांकि, कन्नूर जिले की मट्टानूर नगरपालिका में इस बार चुनाव नहीं हो सके, क्योंकि वहां अगला चुनाव सितंबर 2027 में निर्धारित है।
पहले चरण में 9 दिसंबर को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की और एर्नाकुलम समेत सात जिलों में मतदान हुआ था। इस चरण में तीन नगर निगमों सहित 11,000 से अधिक वार्डों में वोट डाले गए। वहीं, दूसरे चरण में 595 स्थानीय निकायों में मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।
केरल में पहली बार भाजपा को मेयर मिलेगा, राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में 50 सीटों पर बढ़त।
टीवीएम (100/101):
भाजपा 50 🪷
एलडीएफ 29 ☭
यूडीएफ 19 🤚
अन्य 2
एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण मतदान नहीं हुआ।#BJP #Kerala #Thiruvananthapuram… pic.twitter.com/wKq2Amw8Ik
— One India News (@oneindianewscom) December 13, 2025
अब तक सामने आए रुझानों में एनडीए के लिए बड़ी खुशखबरी दिखाई दे रही है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए लगातार बढ़त बनाए हुए है। मौजूदा रुझानों के अनुसार, एनडीए 25 ग्राम पंचायतों और 2 नगर पालिकाओं में आगे चल रही है। अगर यह बढ़त बरकरार रहती है, तो केरल में पहली बार भाजपा को मेयर पद हासिल होने की संभावना बन सकती है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के लिए भी यह चुनाव राहत भरा नजर आ रहा है। नगर निगम, नगर पालिका, जिला पंचायत, ब्लॉक पंचायत और ग्राम पंचायत—लगभग हर स्तर पर यूडीएफ ने मजबूत बढ़त बनाई हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन स्थानीय निकाय चुनावों के अंतिम नतीजों का असर 2026 में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। इससे पहले 2010 और 2015 के स्थानीय निकाय चुनावों में जब लेफ्ट गठबंधन के खिलाफ माहौल बना था, तो उसका सीधा प्रभाव विधानसभा चुनावों पर दिखा था। उसी क्रम में 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों में विपक्ष को जीत मिली थी।
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