इंश्योरेंस पॉलिसी लेने वाले ग्राहकों को अक्सर प्रीमियम, क्लेम सेटलमेंट और कंपनियों के रवैये को लेकर शिकायत रहती है। सोशल मीडिया पर मिस-सेलिंग, हिडन कमीशन, क्लेम में देरी और पॉलिसी की शर्तों को लेकर नाराज़ ग्राहकों की भरमार देखने को मिलती है। लेकिन अब ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा बिल 2025’ के पास होने के बाद यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। लोकसभा में मंगलवार को पारित इस बिल में पॉलिसीहोल्डर के हितों को सर्वोपरि रखा गया है।
इस नए कानून के तहत अब इंश्योरेंस कंपनी या एजेंट पॉलिसी बेचते समय जो भी वादा करेगा, उसे हर हाल में निभाना होगा। तकनीकी खामियां निकालकर क्लेम देने से इनकार करना आसान नहीं रहेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि इस कानून से इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता आएगी और गलत तरीकों से कमाई पर सख्त रोक लगेगी।
बिल का सबसे बड़ा और अहम प्रावधान गलत कमाई की वापसी (Disgorgement) से जुड़ा है। इसके तहत IRDAI को यह अधिकार मिलेगा कि अगर कोई इंश्योरेंस कंपनी या एजेंट नियमों को दरकिनार कर मुनाफा कमाता है, तो वह पैसा वापस लिया जा सकेगा। पहले ऐसी स्थिति में कंपनियां सिर्फ जुर्माना देकर बच जाती थीं, लेकिन अब गलत तरीके से कमाई गई रकम लौटानी होगी। इससे धोखाधड़ी और अनियमितताओं पर प्रभावी लगाम लगेगी।
FM @nsitharaman moves The Sabka Bima Sabki Raksha (Amendment of Insurance Laws) Bill, 2025 in LokSabha.
The Bill further to amend the Insurance Act, 1938, the Life Insurance Corporation Act, 1956 and the Insurance Regulatory and Development Authority Act,… pic.twitter.com/Up1uBuWCf0
— SansadTV (@sansad_tv) December 16, 2025
नए कानून में जुर्माने को भी काफी सख्त कर दिया गया है। अब नियम तोड़ने पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह प्रावधान सिर्फ कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि एजेंट्स और अन्य इंटरमीडियरी पर भी लागू होगा। गलत तरीके से वसूले गए पैसे का इस्तेमाल पॉलिसीहोल्डर की सुरक्षा और हितों के लिए किया जाएगा, जिससे ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा।
मिस-सेलिंग पर रोक लगाने के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं। अक्सर एजेंट ज्यादा कमीशन के लालच में ऐसे वादे कर देते हैं, जो पॉलिसी में होते ही नहीं। इसे रोकने के लिए अब कमीशन और रिवॉर्ड पर कैप लगाई जाएगी। IRDAI एजेंट्स और ब्रोकर के कमीशन की सीमा तय कर सकेगा और पॉलिसी बेचने पर मिलने वाले कमीशन की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इससे एजेंट्स का फोकस सिर्फ बिक्री नहीं, बल्कि ग्राहक के हित पर होगा।
नए नियमों से इंश्योरेंस एजेंट्स के लिए भी प्रक्रिया आसान हो गई है। एक बार रजिस्ट्रेशन के बाद बार-बार रिन्यूअल की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स में छूट दी जाएगी। कुल मिलाकर यह बिल इंश्योरेंस सेक्टर को ज्यादा कस्टमर-फोकस्ड बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे पॉलिसीहोल्डर पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में होगा।
सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में 100 प्रतिशत एफडीआई की भी मंजूरी दे दी है। पहले विदेशी निवेश की सीमा 74 प्रतिशत थी, जिसे अब हटा दिया गया है। इससे विदेशी कंपनियों की भारत में एंट्री आसान होगी, नई टेक्नोलॉजी और बेहतर प्रोडक्ट्स बाजार में आएंगे। साथ ही एलआईसी (LIC) जैसी सरकारी कंपनियों को भी ज्यादा ऑपरेशनल आजादी मिलेगी और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
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