लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में “मुस्लिम बनो और निकाह करो” कहकर कथित रूप से उत्पीड़न करने के आरोपी रेज़िडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक के खिलाफ योगी सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। केजीएमयू प्रशासन ने आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया है और उसकी कैंपस में एंट्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इससे पहले पीड़िता की तहरीर पर लखनऊ की चौक कोतवाली में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच कमेटी के समक्ष पेश होने के बाद आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
सोमवार (22 दिसंबर 2025) को पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। सीएम योगी ने फोन पर बातचीत कर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया और केजीएमयू प्रशासन से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी। फिलहाल पीड़िता को पुलिस सुरक्षा दी गई है और 24 घंटे उसके साथ एक सिपाही तैनात है। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जांच के लिए बनी विशाखा समिति ने अपनी रिपोर्ट कॉलेज प्रशासन को सौंप दी, जिसके आधार पर रमीजुद्दीन को निलंबित किया गया।
पीड़िता पश्चिम बंगाल की रहने वाली है और केजीएमयू में एमडी पैथोलॉजी की छात्रा है। आरोपी डॉक्टर रमीजुद्दीन उसका सीनियर है और खुद भी एमडी पैथोलॉजी थर्ड ईयर का छात्र है। वह उत्तराखंड का रहने वाला बताया गया है। प्रारंभिक जांच में आरोपों के समर्थन में सबूत मिलने की बात कही गई है।
पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 का है, जब पीड़िता ने कथित प्रताड़ना से परेशान होकर दवाओं की ओवरडोज लेकर आत्महत्या की कोशिश की। उसे केजीएमयू में ही भर्ती कराया गया और बाद में परिवार को सूचना दी गई। 19 दिसंबर को पीड़िता का परिवार लखनऊ पहुँचा। पीड़िता के पिता भी पेशे से डॉक्टर हैं।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी मुलाकात रमीजुद्दीन से 2023 में हुई थी। दोस्ती के बाद उसने कथित तौर पर प्रेम जाल में फँसाया और धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया। उसने कहा कि “मुस्लिम बनो और निकाह करो।” मना करने पर आरोपी ने मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़िता को आरोपी के शादीशुदा होने की जानकारी उसकी पहली पत्नी से मिली थी।
पीड़िता का आरोप है कि रमीजुद्दीन ने उसे इस कदर प्रताड़ित किया कि वह आत्महत्या का प्रयास करने को मजबूर हो गई। उसने यह भी दावा किया कि फरवरी 2025 में आरोपी ने एक और हिन्दू लड़की को धर्मांतरण के लिए मजबूर कर उससे निकाह कर लिया था।
जांच के दौरान सोमवार को आरोपी डॉक्टर रमीजुद्दीन जांच समिति के सामने पेश हुआ। शुरुआत में वह बीमारी का बहाना बनाकर पेश होने से बचता रहा और फोन कॉल्स का जवाब नहीं दिया। बाद में व्हाट्सएप के जरिए संपर्क होने पर भी उसने असमर्थता जताई, लेकिन समिति के सख्त रुख के बाद उसे उपस्थित होना पड़ा। वह अपने पिता के साथ जांच समिति के समक्ष पहुँचा।
जांच के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए यह भी दावा किया कि वह शादीशुदा नहीं है। इस पर समिति ने उससे एफिडेविट देने को कहा, ताकि यह साबित किया जा सके कि वह अविवाहित है। जांच समिति के सदस्य डॉक्टर के.के. सिंह के मुताबिक, शादी से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है। उन्होंने बताया कि आरोपी ने एडमिशन के समय खुद को अविवाहित बताया था और जांच रिपोर्ट के आधार पर उसे 24 घंटे के भीतर सस्पेंड कर दिया गया।
निलंबन आदेश डीन एकेडमिक्स प्रो. डॉ. वीरेन्द्र आत्मा की ओर से जारी किया गया, जिसमें साफ कहा गया कि जांच पूरी होने तक आरोपी केजीएमयू कैंपस में प्रवेश नहीं कर सकेगा। हालांकि उसे लखनऊ छोड़ने की अनुमति नहीं है और जब भी जांच समिति बुलाएगी, उसे उपस्थित होना होगा। इसके बावजूद पुलिस उसे फिलहाल फरार बता रही है।
इस घटना के बाद केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग में माहौल शांत लेकिन तनावपूर्ण है। विभाग का कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है, लेकिन छात्र आपस में इस मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
वीएचपी के समरेन्द्र जी ने दावा किया कि केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग में यह पहला मामला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी एक मुस्लिम महिला द्वारा अपनी हिन्दू रूम पार्टनर पर निकाह के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया था, जिससे पीड़िता ने आत्महत्या का प्रयास किया था।
22 दिसंबर 2025 को पीड़िता अपने परिवार के साथ महिला आयोग के कार्यालय पहुँची और उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से मुलाकात की। पीड़िता ने बताया कि वह बेहद डर और मानसिक तनाव में है और खुद तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंकित है।
पीड़िता की आपबीती सुनकर अपर्णा यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लड़की को इस हद तक प्रताड़ित किया गया कि वह अपनी जान लेने पर मजबूर हो गई। उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने और अदालत में कड़ी सजा दिलाने का भरोसा दिया।
इस मामले को लेकर एबीवीपी ने केजीएमयू के सामने धरना प्रदर्शन किया और कुलपति सोनिया नित्यानंद को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने 15 दिनों के भीतर जांच पूरी करने की मांग की और चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। वहीं मंगलवार (23 दिसंबर 2025) की शाम नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (NMO) ने केजीएमयू के गेट नंबर-1 पर कैंडल मार्च निकाला।
एबीवीपी की लखनऊ महानगर मंत्री सरिता पांडे ने सवाल उठाया कि यदि केजीएमयू जैसी प्रतिष्ठित संस्था में धर्मांतरण के लिए दबाव देकर छात्रा को प्रताड़ित किया जा सकता है, तो अन्य शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति क्या होगी।
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