असम पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और अन्य राज्यों की सुरक्षा इकाइयों के साथ मिलकर एक बड़े संयुक्त अभियान में IMK (Imam Mahmude Kafila) नामक सक्रिय जिहादी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क लंबे समय से असम में कट्टरपंथी गतिविधियों को बढ़ावा देने और युवाओं को चरमपंथ की ओर धकेलने में सक्रिय था।
ऑपरेशन के तहत असम और त्रिपुरा में एक साथ कई जगह छापेमारी की गई। असम के बरपेटा और चिरांग जिलों में भी रेड डाली गई। इस कार्रवाई में कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 10 आरोपी असम से और 1 आरोपी त्रिपुरा से पकड़ा गया है।
मामले को STF पुलिस स्टेशन केस नंबर 06/2025 (दिनांक 28.12.2025) के तहत दर्ज किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराएं 143, 147, 148, 149, 150, 152, 113(5) और UAPA 1967 की धाराएं 10, 13, 16, 38, 39 और 40 शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि IMK मॉड्यूल की स्थापना 2018 में हुई थी और इसके संबंध जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और अल-कायदा इन इंडियन सबकॉण्टिनेंट (AQIS) जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। यह मॉड्यूल भारत में आर्म्ड जिहाद और डिजिटल जिहाद दोनों को अंजाम दे रहा था।
कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने के लिए यह नेटवर्क सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता था। खास तौर पर असम के ग्रामीण इलाकों के युवाओं को टारगेट किया जाता था। युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए ब्रेनवॉश किया जाता और फिर वीडियो कॉल या रिकॉर्डिंग के माध्यम से उनसे ‘ओथ’ (शपथ) दिलवाई जाती थी।
इन शपथ से जुड़े वीडियो को बांग्लादेश भेजा जाता था, जहाँ से मॉड्यूल को आगे के निर्देश मिलते थे। फंडिंग के लिए इस नेटवर्क ने हवाला प्रणाली का इस्तेमाल किया, ताकि पैसों के लेन-देन को ट्रैक करना मुश्किल रहे और गतिविधियां गुप्त रूप से चलती रहें।
जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे IMK नेटवर्क को बांग्लादेश में बैठे एक ‘अमीर’ द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। उसका नाम ज्वेल महमूद उर्फ इमाम महमूद साहिदुल्लाह बताया गया है, जो JMB का पूर्व सदस्य रह चुका है। इसके अलावा यह मॉड्यूल JMB, ABT और AQIS से भी निर्देश प्राप्त करता था।
असम में इस जिहादी नेटवर्क की कमान तमीम के हाथ में थी, जो स्थानीय स्तर पर भर्ती, फंडिंग और गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते कट्टरपंथ पर करारा प्रहार है और आगे भी जांच जारी रहेगी।
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