बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित मधुकर निकेतन में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर संस्कृति उत्थान समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ध्वजारोहण किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में नागरिक, स्वयंसेवक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें आपसी वैमनस्य को छोड़कर सद्भाव और समरसता के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय पर्व केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि समाज के लिए आत्ममंथन और जिम्मेदारी का दिन भी है।
आज 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर संस्कृति उत्थान समिति द्वारा मधुकर निकेतन, मुजफ्फरपुर (बिहार) में आयोजित कार्यक्रम में पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ध्वज वंदन किया। pic.twitter.com/q7PUitslU7
— RSS (@RSSorg) January 26, 2026
डॉ. भागवत ने संविधान की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि देश में लागू सभी नियम और कानून संविधान के दायरे में बनाए गए हैं। यदि कोई कानून समयानुकूल नहीं है, तो उसे बदलने की प्रक्रिया भी संविधान के भीतर रहकर ही होती है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई कानून अस्तित्व में है, तब तक उसका पूरी निष्ठा से पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में कई ऐसे नियम और आचार होते हैं जो संविधान में लिखे नहीं होते, बल्कि परंपराओं के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी चले आते हैं। ये परंपराएँ इसलिए बनी रहती हैं क्योंकि उनका जीवन में व्यावहारिक महत्व होता है। समय के साथ परंपराएँ बदलती हैं और नई परंपराओं का भी निर्माण होता है।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. भागवत ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्षों के त्याग और बलिदान के बाद हमें स्वतंत्रता दिलाई है, उसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सब मिलकर भारत को दुनिया का सिरमौर देश बनाएं और पूरी दुनिया में धर्म, सुख और शांति का संदेश दें। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस उसी कर्तव्य को याद करने, उस पर विचार करने और उसके अनुरूप आचरण करने का दिन है।
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