लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक जिहादी डॉक्टरों के गैंग का खुलासा हुआ है, जो हिन्दू लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उन्हें निकाह करने और धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव बनाता था। आरोप है कि गैंग लड़कियों के अश्लील फोटो और वीडियो का सहारा लेकर ब्लैकमेलिंग करता और फर्जी निकाहनामा तैयार कर निकाह करता था।
घटना का पहला पता 17 दिसंबर 2025 को चला, जब एक हिन्दू महिला डॉक्टर ने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। पीड़िता ने पैथोलॉजी विभाग के सीनियर डॉक्टर रमीज मलिक पर उसे निकाह और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने, शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
पीड़िता के पिता ने मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग से शिकायत की। महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान और उपाध्यक्ष अपर्णा यादव सक्रिय हुईं और कुलपति से मुलाकात कर जानकारी ली। आयोग ने कहा कि धर्मांतरण में एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरी गैंग शामिल है, जिसे बेनकाब किया जाएगा।
जाँच के बाद डॉक्टर रमीज मलिक को KGMU से सस्पेंड कर दिया गया। कॉलेज प्रशासन की जाँच में वह खुद को निर्दोष बताता रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया और 9 जनवरी 2026 को उसे गिरफ्तार किया। इसके साथ ही उसके पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी 5 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया।
जाँच में सामने आया कि सलीमुद्दीन ने भी अलग-अलग राज्यों की चार हिंदू महिलाओं से निकाह कर धर्म परिवर्तन कराया था। उसके परिवार का प्रभाव रमीज मलिक तक पहुँचा, जिसने मेडिकल कॉलेजों में हिंदू लड़कियों को फँसाने और धर्म परिवर्तन कराने का नेटवर्क बनाया।
KGMU में रमीज मलिक ने कई हिंदू महिला डॉक्टरों को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, उनके अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। वह अन्य मुस्लिम डॉक्टरों और मौलानाओं के सहयोग से यह नेटवर्क चला रहा था। जाँच में उसके मोबाइल और लैपटॉप से 50 से अधिक युवतियों के वीडियो और अश्लील सामग्री बरामद हुई।
इसके अलावा, रमीज मलिक ने कॉल गर्ल्स का डेटा भी अपने पास रखा था, जिसका इस्तेमाल धर्मांतरण रैकेट में किया जाता था। पुलिस को शक है कि यह पूरा नेटवर्क फर्जी निकाहनामों और ब्लैकमेलिंग के जरिए काम करता था।
KGMU प्रशासन की मिलीभगत और चुप्पी भी सामने आई। पैथोलॉजी विभाग के HoD वाहिद अली को घटना की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कई दिनों तक इसे दबाए रखा। मामले के सामने आने पर उन्हें पद से हटा दिया गया और डॉ. रश्मि कुशवाहा को इंचार्ज बनाया गया।
जाँच अब एसटीएफ और पुलिस संयुक्त रूप से कर रही है। शुरुआती जाँच में सामने आया कि रमीज मलिक का नेटवर्क सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं था, बल्कि आगरा, नोएडा और अन्य जिलों तक फैला था। कई मौलाना KGMU में नियमित आते-जाते थे और डॉक्टरों को हिंदू लड़कियों को टारगेट करने के लिए संदेश देते थे।
इस खुलासे के बाद KGMU में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ बढ़ गई हैं, क्योंकि परिसर में कई अवैध मजारें बनी हुई हैं, जिनके आसपास पहले भी हमले हो चुके हैं। पुलिस प्रशासन ने कई दुकानों को हटाया, लेकिन मजारें अब भी मौजूद हैं।
समाजवादी और बसपा सरकार के दौर में KGMU धर्मांतरण का बड़ा अड्डा बना हुआ था। योगी सरकार के आने के बाद हालात कुछ समय के लिए शांत हुए थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह गतिविधियाँ फिर से सक्रिय हो गई हैं।
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