रायपुर में 9 साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी को कई दिन बीत चुके हैं। आरोपी 65 वर्षीय अब्दुल सज्जाद अंसारी को जेल भेज दिया गया है, लेकिन बच्ची अब भी गहरे सदमे में है। उसने स्कूल जाना छोड़ दिया है, न हँसती है और न ही पहले की तरह खिलखिलाती है। वह हमेशा सहमी रहती है और किसी के स्पर्श मात्र से डर जाती है।
बच्ची के माता-पिता उसे बचपन में ही छोड़ गए थे। वह अपनी बुज़ुर्ग दादी के साथ रहती है, जो दूसरों के घरों में बर्तन धोकर किसी तरह उसका पालन-पोषण कर रही हैं।
बच्ची के घर से कुछ दूरी पर ही वह दुकान है, जहाँ आरोपी अब्दुल ने वारदात को अंजाम दिया। बताया गया कि वह बच्ची को चॉकलेट देने के बहाने बुलाता था। बच्ची उसे बाकी बच्चों की तरह ‘दादा’ कहती थी और पहचान होने के कारण उस पर भरोसा करती थी। घटना वाले दिन भी वह चॉकलेट लेने ही गई थी, लेकिन दुकान के अंदर दरिंदगी का शिकार हो गई।
घटना के बाद बच्ची का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। वह स्कूल नहीं जाना चाहती थी और पेट दर्द का बहाना बनाती थी। दादी को शुरू में सच्चाई का अंदाज़ा नहीं हुआ और उन्होंने उसे डाँटा भी। बाद में बच्ची ने अपनी चाची को पूरी घटना रोते हुए बता दी। इसके बाद चाची ने दादी को जानकारी दी।
दादी ने स्थानीय पार्षद को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। प्रशासन ने आरोपी की अवैध दुकान भी ढहा दी। दादी ने दरिंदे को फाँसी देने की माँग की है।
इस बीच आरोपी की दुकान तोड़े जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बुलडोजर की राजनीति कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था संभालने में बीजेपी सरकार विफल रही है।
वहीं, बच्ची अब भी खामोशी में जी रही है। कभी हर वक्त बोलने और मुस्कुराने वाली मासूम अब चुप रहती है, स्कूल के नाम से डर जाती है और हर पल सहमी हुई नज़र आती है। उसका दर्द शब्दों से ज्यादा उसकी आँखों में दिखाई देता है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel