मुंबई की राजनीति में एक बड़े और अहम फेरबदल के तहत एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों से नवनिर्वाचित चार नगरसेवक शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए हैं, जिनमें अजित पवार गुट के तीन और शरद पवार गुट का एक नगरसेवक शामिल है। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद बीएमसी में शिवसेना (शिंदे) के नेतृत्व में एक संयुक्त विधायी समूह का गठन किया गया है, जिसमें NCP (अजित पवार गुट) और शरद पवार गुट के एक-एक नगरसेवक को शामिल किया गया है।
बताया जा रहा है कि मंगलवार को महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति बीएमसी में खुद को दो अलग-अलग समूहों के रूप में औपचारिक रूप से पंजीकृत कराने जा रही है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक स्वतंत्र समूह बनाएगी, जबकि शिवसेना (शिंदे) NCP के दोनों गुटों के नगरसेवकों के साथ संयुक्त समूह के रूप में रजिस्ट्रेशन कराएगी। इस पुनर्संयोजन के चलते शिवसेना (शिंदे) की व्यक्तिगत संख्या 29 से बढ़कर 33 हो गई है और इसके साथ ही बीएमसी में महायुति की कुल ताकत 122 नगरसेवकों तक पहुंच गई है।
सूत्रों का कहना है कि यह कदम आगामी प्रशासनिक और संगठनात्मक फैसलों को ध्यान में रखते हुए पूरी रणनीति के तहत उठाया गया है। उल्लेखनीय है कि मुंबई का जनादेश इस बार महायुति के लिए ऐतिहासिक रहा, जहां लगभग तीन दशकों से चला आ रहा ठाकरे परिवार का दबदबा टूट गया। भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने 118 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें भाजपा 90 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना (शिंदे) ने 29 सीटें हासिल कीं।
इसके उलट शिवसेना (UBT) के लिए यह चुनाव बेहद निराशाजनक रहा और पार्टी को केवल 65 सीटों से संतोष करना पड़ा, जबकि 2017 में उसके पास 84 सीटें थीं। महज आठ वर्षों में 19 सीटों की गिरावट ने मुंबई की राजनीति में बदलते समीकरणों और शक्ति संतुलन की नई तस्वीर पेश कर दी है।
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