लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ के कथित अंशों का हवाला देने के बाद गलवान संघर्ष को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। संसद में सोमवार से शुरू हुआ हंगामा मंगलवार को भी जारी रहा। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2020 के पूर्वी लद्दाख संकट के दौरान सरकार निर्णय लेने में देर कर रही थी, जबकि बीजेपी और सरकार की ओर से इन आरोपों को भ्रामक बताया जा रहा है।
2020 गलवान संघर्ष और PLA की घुसपैठ
2020 में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने पूर्वी लद्दाख में अचानक गतिविधियां बढ़ाकर LAC पर तनाव पैदा कर दिया था। उस समय नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख रहे लेफ्टिनेंट जनरल वायके जोशी ने अपनी किताब ‘Who Dares Wins: A Soldier’s Memoir’ में बताया है कि चीन ने बड़ी सैन्य तैयारी के साथ घुसपैठ की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने रणनीतिक जवाब देकर स्थिति संभाल ली। गलवान घाटी में 15 जून 2020 को हिंसक झड़प हुई, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए।
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड ने पलटी बाजी
जोशी की किताब के अनुसार भारतीय सेना ने ‘जैसे को तैसा’ रणनीति अपनाते हुए ऑपरेशन स्नो लेपर्ड शुरू किया, जिसने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। पेंगोंग त्सो के उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर ऊंचाइयों पर कब्जा करके भारतीय सेना ने चीन को रणनीतिक रूप से पीछे धकेल दिया। रातों-रात हुई इस कार्रवाई ने PLA को चौंका दिया और अंततः उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर किया।
राहुल गांधी ने नरवणे की अप्रकाशित किताब से उठाए सवाल
राहुल गांधी ने लोकसभा में दावा किया कि जनरल मनोज नरवणे की अप्रकाशित किताब में लिखा है कि अगस्त 2020 में रेचिन ला के पास चीनी टैंक आगे बढ़े थे और सेना को शुरुआत में स्पष्ट निर्देश नहीं मिले। उनके अनुसार बाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना को ‘जो उचित लगे करें’ कहा, जिसे फ्री हैंड माना गया। कांग्रेस इसे सरकार की कथित अनिर्णय की स्थिति का उदाहरण बता रही है।
The Indian Army climbed up the 5000+ meter heights above and behind the Chinese to surprise them on Finger 4. In the south, Indian armour was positioned on Rechin La and Rezang La, dominating Chinese positions and forcing a withdrawal. A video tour. pic.twitter.com/l6OpufFAU9
— shiv_cybersurg (@shiv_cybersurg) February 3, 2026
नरवणे के सार्वजनिक बयान पेश करते हैं अलग तस्वीर
हालांकि जनरल नरवणे के सार्वजनिक इंटरव्यू और बयानों में अलग तस्वीर सामने आती है। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि भारत ने गलवान संकट के दौरान एक इंच जमीन नहीं खोई और सरकार ने सेना को पूरा समर्थन दिया। उनके अनुसार कैलाश रेंज पर कब्जा और सामरिक कार्रवाई ने चीन को चौंका दिया और भारत मजबूत स्थिति में रहा।
सेना-सरकार समन्वय पर जोशी की किताब का दावा
लेफ्टिनेंट जनरल वायके जोशी अपनी मेमॉयर में लिखते हैं कि प्रधानमंत्री स्तर पर सेना को फ्री हैंड दिया गया था और सैन्य कार्रवाई व कूटनीतिक प्रयास साथ-साथ चलते रहे। भारत ने तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, निगरानी और तैनाती बढ़ाकर PLA की रणनीति को विफल किया।
राजनीतिक बनाम सैन्य नैरेटिव की बहस
गलवान संघर्ष को लेकर अब राजनीतिक नैरेटिव और सैन्य दृष्टिकोण के बीच बहस तेज हो गई है। जहां विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बयान और किताबों में भारतीय रणनीति और सैन्य समन्वय को सफलता की कहानी बताया गया है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel