असम में ‘मियाँ’ शब्द को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के बयान पर विपक्ष लगातार बीजेपी को घेर रहा है, जबकि मुख्यमंत्री बार-बार स्पष्ट कर रहे हैं कि उनका इशारा किसी समुदाय विशेष नहीं बल्कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की ओर है। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया और अदालत तक बहस को तेज कर दिया है। दिल्ली और असम समेत कई जगहों पर एफआईआर दर्ज कराए जाने की खबरें सामने आई हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘मियाँ’ शब्द का इस्तेमाल असम में बंगाली मुस्लिम समुदाय के लिए किया जाता है, जो वर्षों से भारत के नागरिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के बयान से सामाजिक विभाजन को बढ़ावा मिलता है। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी मुख्यमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट के नाम का गलत संदर्भ देने का आरोप लगाया और कहा कि कोर्ट ने ऐसे शब्दों को स्वीकार नहीं किया है।
"How small are you?": Owaisi attacks Assam CM Sarma over "Miya" remark
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— ANI Digital (@ani_digital) February 5, 2026
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि ‘मियाँ’ शब्द का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के संदर्भ में किया जाता है। उन्होंने कहा कि असम में बढ़ती अवैध माइग्रेशन पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है और राज्य की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए कड़े कदम जरूरी हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनका अभियान हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण नहीं बल्कि ‘असमिया बनाम बांग्लादेशी’ मुद्दे पर केंद्रित है।
बांग्लादेश से आए हुए लोग खुद को मिया कहकर ही संबोधित करते हैं। वे मिया कविता लिखते हैं, मिया संग्रहालय की मांग करते हैं, तो अगर मैं उन्हें मिया कहकर संबोधित करूँ, तो उसमें दिक्कत क्या है। pic.twitter.com/z57lzJr94s
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) January 29, 2026
विपक्ष की आलोचना पर पलटवार करते हुए सरमा ने कहा कि राज्य की सुरक्षा और पहचान के लिए कठोर फैसले लेने होंगे। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण के दौरान संदिग्ध नामों की पहचान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर अवैध घुसपैठ पर रोक नहीं लगाई गई तो राज्य की जनसांख्यिकीय स्थिति और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
असम में 'मिया' का मतलब बांग्लादेशी घुसपैठिया है।
एक नहीं, चाहे 1000 राहुल गांधी चिल्लाएँ, मैं रुकने वाला नहीं हूँ। घुसपैठियों को असम छोड़ना ही पड़ेगा। यह असम के अस्तित्व का सवाल है। pic.twitter.com/ThCw7Crtwf
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) January 31, 2026
असम में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए ‘मियाँ’ शब्द और अवैध घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बन गया है। विधानसभा में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 1971 से 2014 के बीच 47,928 लोगों को फॉरेन ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया, जिनमें 27,309 मुस्लिम और 20,613 हिंदू शामिल हैं। सरकार का कहना है कि घुसपैठ की समस्या से निपटना राज्य की प्राथमिकता है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति बता रहा है।
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