प्रसिद्ध संगीतकार ए.आर. रहमान एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। मणिरत्नम की तमिल फिल्म पोन्नियन सेल्वन-2 के चर्चित गीत ‘वीरा राजा वीरा’ को लेकर उन पर ध्रुपद शैली की पारंपरिक रचना ‘शिव स्तुति’ की नकल करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डागरवाणी परंपरा और डागर परिवार के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए मूल रचनाकारों को उचित मान्यता देने पर विचार करने की बात कही है।
क्या है पूरा मामला
ध्रुपद शैली के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक उस्ताद फैय्याज वासिफुद्दीन डागर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत में उनके परिवार की पारंपरिक रचना ‘शिव स्तुति’ के सुर, ताल और संगीत संरचना का बिना अनुमति उपयोग किया गया।
Original vs Copied. Meet AR Rahman the ultimate coiper. He has copied from a wide variety of sources – Hollywood, Indian, Western classical. He's now blaming communal bias for his lack of opportunities. What a thankless person – Hindus elevated him to superstardom and today he's… pic.twitter.com/F0lSNRs9g7
— Rakesh Krishnan Simha (@ByRakeshSimha) February 13, 2026
डागर परिवार का दावा है कि यह रचना नासिर फैयाजुद्दीन डागर और जहीरुद्दीन डागर द्वारा 1970 के दशक में तैयार की गई थी और 1978 में एम्स्टर्डम में पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत हुई थी।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ‘वीरा राजा वीरा’ सहित ए.आर. रहमान के कई चर्चित गानों की धुनों की तुलना कथित मूल रचनाओं से की जा रही है। वीडियो में ‘जय हो’, ‘ये हंसी वादियां’, ‘चल्ला’, ‘मुकाबला’ समेत अन्य गीतों को लेकर भी समानता के दावे किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि डागरवाणी परंपरा और डागर परिवार के योगदान को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। उन्होंने टिप्पणी की कि अगर ऐसे घरानों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में योगदान न दिया होता, तो आधुनिक गायकों की पहचान बनना मुश्किल होता।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि विवाद मूल धुन की मौलिकता से अधिक लेखक और पहले प्रस्तोता की मान्यता को लेकर है।
रहमान पक्ष का जवाब
रहमान की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वीकार किया कि गीत की प्रेरणा डागरवाणी परंपरा से ली गई है, लेकिन कानूनी पहलुओं पर अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने सुझाव दिया कि कम से कम रचना के पहले सार्वजनिक प्रदर्शन का श्रेय डागर परिवार को दिया जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी।
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