उत्तर प्रदेश के बाँदा में पॉक्सो कोर्ट ने एक चौंकाने वाले मामले में सरकारी इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को बच्चों के यौन शोषण और अश्लील वीडियो-फोटो बनाने और डार्क वेब पर बेचने के आरोप में फाँसी की सजा सुनाई है। यह मामला साल 2020 में चित्रकूट से सामने आया था और पूरे देश को हिला दिया था।
रामभवन, जो चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था, और उसकी पत्नी गरीब परिवारों के बच्चों को पैसे, मोबाइल, गेम और खिलौनों के बहाने अपने जाल में फंसाते और उनका यौन शोषण करते थे। इसके बाद लैपटॉप और वेब कैमरे से बच्चों के वीडियो और फोटो बनाए जाते और अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क पर बेचे जाते थे।
अक्टूबर 2020 में इंटरपोल की सूचना पर CBI ने जांच शुरू की। जाँच में उनके घर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, नकदी और डिजिटल सबूत बरामद हुए। मामले में सामने आया कि 50 से अधिक बच्चों का शोषण किया गया और उनके वीडियो-फोटो चीन, अमेरिका, ब्राजील, अफगानिस्तान समेत 47 देशों में भेजे गए।
करीब 5 साल चले ट्रायल में 74 गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल सबूत पेश किए गए। पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने इसे ‘रेयरस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में गिना और पति-पत्नी दोनों को फाँसी की सजा सुनाई। साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि हर पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।
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