Assam की राजनीति में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के तीन निलंबित विधायकों—कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास और शशिकांत दास—ने आधिकारिक तौर पर Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थाम लिया।
मंगलवार (3 मार्च) को गुवाहाटी स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में इन नेताओं ने पार्टी की सदस्यता ली। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा भी भाजपा में शामिल हुए थे।
हिमंता बिस्वा सरमा ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने विधायकों के शामिल होने पर इसे भाजपा के लिए “ऐतिहासिक दिन” बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों का भाजपा में आना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
#WATCH | Guwahati: Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma says, "Last night, we have completed our discussions with the Asom Gana Parishad, Bodoland People's Forum, and Rabha Hasong Joutha Sangram Committee. As far as the NDA is concerned, our talks on seat sharing are now… pic.twitter.com/sYezVU1teW
— ANI (@ANI) March 5, 2026
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Dilip Saikia भी मौजूद रहे। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने राज्य में कांग्रेस की अंदरूनी कलह को फिर उजागर कर दिया है।
NDA में सीट शेयरिंग पर सहमति
मुख्यमंत्री ने बताया कि आगामी चुनावों के लिए NDA के सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो चुका है।
गठबंधन में शामिल प्रमुख दल:
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Asom Gana Parishad (AGP)
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Bodoland People’s Front (BPF)
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Rabha Hasong Jautha Sangram Samiti
मुख्यमंत्री के अनुसार, NDA अब पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है।
कांग्रेस के सामने अस्तित्व का संकट?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार नेताओं और विधायकों के पार्टी छोड़ने से असम में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो रही है। इससे न केवल विधानसभा में संख्या प्रभावित हुई है, बल्कि कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर पड़ा है।
असम की सियासत में यह घटनाक्रम आगामी चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
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