पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति Droupadi Murmu के दौरे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति ने राज्य की Mamata Banerjee सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि जनजातीय समुदाय से जुड़े इंटरनेशनल संथाल कॉन्क्लेव को अनुमति नहीं दी गई और राष्ट्रपति के स्वागत के लिए राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि भी मौजूद नहीं था, जिसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा रहा है।
राष्ट्रपति ने कार्यक्रम के दौरान प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि कार्यक्रम स्थल पर हालात बहुत ज्यादा भीड़भाड़ वाले हैं, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें ऐसा नहीं लगा। उन्होंने कहा, “पता नहीं प्रशासन के मन में क्या था, हम तो आसानी से यहाँ आ गए। उन्होंने कहा था कि यहाँ हालात बहुत कंजस्टेड हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यहाँ 5 लाख लोग भी आसानी से इकट्ठे हो सकते हैं।”
Recent developments in West Bengal raise serious concerns about the breakdown of constitutional norms under the Mamata Banerjee government.
In an extremely rare situation, the Hon’ble President of India, Smt. Droupadi Murmu, publicly expressed dissatisfaction over the lack of… pic.twitter.com/e2INbv3qEI
— BJP West Bengal (@BJP4Bengal) March 7, 2026
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वे अपने जनजातीय भाई-बहनों से मिलकर उनके हालात देखना चाहती थीं, लेकिन प्रशासन की ओर से इसमें अड़चनें डाली गईं। बताया जा रहा है कि उत्तर बंगाल में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल संथाल कॉन्क्लेव को अनुमति नहीं दी गई, जबकि राष्ट्रपति इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति के स्वागत के लिए राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि न होना प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने भी ममता सरकार पर निशाना साधा है और मामले को राजनीतिक तूल मिलने लगा है।
फिलहाल यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मुद्दा बन गया है और राष्ट्रपति की नाराजगी ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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