केंद्र सरकार ने NH-37 के 13 किलोमीटर हिस्से को चार लेन बनाने के लिए 1186.20 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि ये सड़क सिलचर से जिरीबाम तक जाएगी, जिससे असम, मणिपुर और मेघालय के बीच रास्ते आसान होंगे। इस प्रोजेक्ट से हिंसा प्रभावित रहे जिरीबाम के लोगों को भी फायदा मिलेगा।
गडकरी ने कहा कि ये प्रोजेक्ट न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ाएगा, बल्कि रोजगार और व्यापार के नए मौके भी लाएगा।
NH-37 के चौड़ीकरण परियोजना – मुख्य तथ्य
मापदंड | विवरण |
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परियोजना | NH-37 के 13 किमी हिस्से को चार लेन में विकसित करना |
लागत | ₹1186.20 करोड़ |
राज्य | असम और मणिपुर |
केंद्रीय मंत्री | नितिन गडकरी (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री) |
प्रमुख रूट | सिलचर → जिरीबाम → इम्फाल → शिलॉन्ग |
लाभार्थी राज्य | असम, मणिपुर और मेघालय |
सम्पर्क लाभ | सिलचर, जिरीबाम, जोवाई, शिलॉन्ग, इम्फाल |
प्रभावित क्षेत्र | हिंसा प्रभावित जिरीबाम और आसपास के इलाके |
📢 Assam & Manipur 🛣
▪We have approved ₹1186.20 crore for the four-laning of a 13 km stretch of NH-37 from Silchar (near Budha Nagar) in Assam to Jiribam in Manipur.
▪This corridor will significantly enhance connectivity between Meghalaya, Assam, and Manipur by linking…
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) March 28, 2025
परियोजना के संभावित लाभ
✅ सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण
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हिंसा प्रभावित जिरीबाम क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से आतंरिक सुरक्षा और शांति प्रयासों में सहूलियत।
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यह सड़क पूर्वोत्तर भारत के लिए एक लाइफलाइन कॉरिडोर के रूप में काम करेगी।
✅ आर्थिक लाभ
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स्थानीय व्यापार, बाजार और उत्पादन केंद्रों तक पहुँच आसान होगी।
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रोजगार के अवसर निर्माण—सड़क निर्माण के दौरान और बाद में परिवहन, लॉजिस्टिक्स, और सर्विस सेक्टर में।
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इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ निवेश की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी।
✅ समाज और जीवनस्तर पर प्रभाव
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शिलॉन्ग, सिलचर, इम्फाल, जोवाई जैसे शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों का सीधा और तेज़ संपर्क।
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आपदा प्रबंधन, मेडिकल सुविधा, और शिक्षा तक पहुँच में सुधार।
✅ पर्यटन एवं सांस्कृतिक विकास
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शिलॉन्ग, इम्फाल जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन तक पहुँच आसान होने से पर्यटन में वृद्धि।
केंद्र सरकार की पूर्वोत्तर नीति में यह परियोजना क्यों अहम है?
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नितिन गडकरी की “Act East Policy” और पीएम मोदी के पूर्वोत्तर फोकस के तहत यह प्रोजेक्ट बुनियादी ढाँचे के बड़े मिशन का हिस्सा है।
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केंद्र सरकार पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी और विकास के जरिए चरमपंथ और अलगाववाद को खत्म करने के लिए लगातार निवेश कर रही है।