पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें लगातार सुर्खियों में हैं।
सुष्मिता देव का इस्तीफा TMC नेतृत्व के लिए एक गंभीर राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद राज्य की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है।
हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देव की मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से हुई। इस मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है।
हालांकि अभी तक सुष्मिता देव की ओर से भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनकी यह मुलाकात बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखी जा रही है।
TMC नेता सुष्मिता देव ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। उन्होंने राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया है। pic.twitter.com/L07zsLxApP
— ANI_HindiNews (@AHindinews) June 10, 2026
TMC के भीतर बढ़ रहा असंतोष
पार्टी के अंदर असंतोष का माहौल पहले से ही चर्चा में है। हाल ही में TMC के कई सांसदों और नेताओं ने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई थी।
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में TMC के कई सांसदों ने अलग समूह के रूप में बैठने की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी भेजा था। इससे पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आ गए।
काकोली घोष के नेतृत्व में सक्रिय बागी गुट
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि TMC के भीतर एक प्रभावशाली बागी गुट सक्रिय है। इस गुट का नेतृत्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि इस समूह के साथ कई प्रमुख सांसदों और नेताओं का समर्थन जुड़ चुका है। इनमें बंगाल की राजनीति और मनोरंजन जगत से जुड़े कई चर्चित चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं।
ममता बनर्जी के लिए बढ़ी चुनौती
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब TMC पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतुष्ट नेताओं का यह सिलसिला जारी रहा तो पार्टी नेतृत्व पर दबाव और बढ़ सकता है।
हालांकि TMC की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सुष्मिता देव के इस्तीफे को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजरें सुष्मिता देव के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हैं। क्या वह किसी नए राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनेंगी या किसी अन्य दल में शामिल होंगी, इसे लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे सकता है।.
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