भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को उनके एक सार्वजनिक बयान को लेकर कानूनी नोटिस भेजा गया है। यह विवाद मासिक धर्म स्वच्छता सप्ताह के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में उनके द्वारा सुनाए गए पारिवारिक प्रसंग के बाद शुरू हुआ है। मुंबई के अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय ने उन्हें नोटिस भेजकर बिना शर्त माफी और सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
क्या कहा था डीवाई चंद्रचूड़ ने?
28 मई 2026 को आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने अपने परिवार से जुड़ा एक अनुभव साझा किया था। उन्होंने बताया कि परिवार में पहली बार आयोजित गणेश पूजा के दौरान उनकी बहू ने उनसे पूछा था कि क्या वह मासिक धर्म (पीरियड्स) के दौरान पूजा में शामिल हो सकती हैं।
इस पर चंद्रचूड़ ने कहा था कि “किसी भी इंसान में कोई गंदगी नहीं होती। गंदगी शरीर में नहीं बल्कि सोच में होती है।” इसके बाद उन्होंने अपनी बहू को पूजा में शामिल होने की अनुमति दी थी।
उनका यह बयान सोशल मीडिया और विभिन्न धार्मिक एवं कानूनी मंचों पर चर्चा का विषय बन गया।
कानूनी नोटिस में क्या कहा गया?
मुंबई के अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पूर्व CJI को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी टिप्पणी केवल उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक विचारों तक सीमित थी तथा इसे सनातन धर्म की आधिकारिक व्याख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि किसी पूर्व संवैधानिक पदाधिकारी को हिंदू धर्मग्रंथों, धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों की पुनर्व्याख्या करने का अधिकार नहीं है। इसलिए इस विषय पर सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान को लेकर स्पष्टीकरण आवश्यक है।
सार्वजनिक माफी की मांग
अधिवक्ता ने नोटिस के माध्यम से चंद्रचूड़ से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इस प्रकार के बयान धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकते हैं।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि पूर्व CJI स्पष्ट करें कि उनकी टिप्पणियों का उद्देश्य किसी धार्मिक विवाद या न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना नहीं था।
सबरीमाला विवाद का भी जिक्र
कानूनी नोटिस में सबरीमाला मंदिर प्रवेश से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता ने मांग की है कि चंद्रचूड़ यह स्पष्ट करें कि उनके बयान का किसी भी लंबित धार्मिक या संवैधानिक मामले से कोई संबंध नहीं है और इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना नहीं था।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पूर्व CJI की टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर बहस तेज हो गई है। एक वर्ग इसे महिलाओं की गरिमा और समानता से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय मान रहा है।
फिलहाल डीवाई चंद्रचूड़ की ओर से इस कानूनी नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं।
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