अंधविश्वास में जिंदा जलाए गए एक ही परिवार के पांच लोग, चश्मदीद सोनू ने बताया खौफनाक मंजर
बिहार के पूर्णिया जिले के रजीगंज पंचायत स्थित टेटगामा आदिवासी टोले में अंधविश्वास और अशिक्षा की आग ने एक परिवार की पूरी जिंदगी लील ली। डायन होने के संदेह में गांव की भीड़ ने एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा जला दिया। इस नरसंहार का चश्मदीद गवाह 15 वर्षीय सोनू किसी तरह जान बचाकर भाग निकला और पुलिस तक पहुंचा।

सोनू ने बताया, “गांव के करीब 50 लोग रात 10 बजे लाठी-डंडों और बांस के साथ आए। मेरे पापा, मां, भैया, भाभी और दादी के सिर फोड़ दिए। फिर उन्हें जिंदा जला दिया गया। मैं किसी तरह भागकर अपनी चाची के पास गया, फिर पुलिस को सूचना दी।”
मारे गए लोग थे —
- बाबूलाल उरांव (40)
- सीता देवी (35)
- सातो देवी (65)
- मंजीत (25)
- रानी देवी (20)
इस घटना की वजह बनी रामदेव उरांव की बेटे की बीमारी। बेटे की मौत के बाद रामदेव ने शक के आधार पर बाबूलाल की मां और पत्नी को ‘डायन’ घोषित कर दिया। पंचायत बुलाकर नकुल उरांव की अगुवाई में हत्या की साजिश रची गई और फिर हमला हुआ।

पूरे गांव में सन्नाटा पसरा है, लोग फरार हैं, पशु भूखे पड़े हैं। प्रशासन की सक्रियता अब दिख रही है, लेकिन स्थानीय लोग प्रशासन की लापरवाही पर भी सवाल उठा रहे हैं। आयुक्त राजेश कुमार और एसडीएम पार्थ गुप्ता के दौरे के बाद तीन गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन बड़ी संख्या में आरोपी अब भी फरार हैं।

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के उस डरावने अंधेरे की तस्वीर है जहां अंधविश्वास और सामाजिक कुंठाएं, मानवता और कानून को कुचल डालती हैं। यह कांड डायन प्रथा के खिलाफ कठोर सामाजिक और कानूनी कार्रवाई की माँग करता है, ताकि भविष्य में ऐसी क्रूरता फिर न दोहराई जा सके।