राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बसे ओ-जोन (O-Zone) क्षेत्र की कॉलोनियों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस क्षेत्र की 91 से 94 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 15 लाख परिवारों के सिर पर बुलडोजर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) द्वारा समय-समय पर अदालत में दायर याचिकाओं और पर्यावरणीय नियमों के चलते स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ गई है।
गढ़ी मांडू, ओल्ड उस्मानपुर, सोनिया विहार, जगतपुर, वजीराबाद और यमुना तट के अन्य इलाकों में ओ-जोन के बोर्ड लगाए जाने के बाद लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि कहीं उनके मकानों को अवैध निर्माण घोषित कर ध्वस्त न कर दिया जाए।
क्या है O-Zone और क्यों है विवाद?
दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के अनुसार यमुना नदी और उसके आसपास के लगभग 165 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को O-Zone (ऑर्गेनिक या इको-सेंसिटिव ज़ोन) घोषित किया गया है। यह इलाका वजीराबाद से लेकर ओखला तक फैला हुआ है।
इस क्षेत्र को पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है, इसलिए यहां निर्माण गतिविधियों, व्यावसायिक विकास और स्थायी संरचनाओं पर कई तरह की पाबंदियां लागू हैं। पर्यावरण संरक्षण और यमुना बाढ़ क्षेत्र को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह व्यवस्था बनाई गई थी।
हालांकि, पिछले कई दशकों में यहां बड़ी संख्या में आबादी बस चुकी है और हजारों मकान, बाजार, स्कूल तथा अन्य सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं।
15 लाख लोगों के सामने आवास संकट की आशंका
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं। उनके पास बिजली, पानी, सीवर और अन्य सरकारी सुविधाओं के वैध कनेक्शन हैं। कई परिवारों ने अपनी जीवनभर की कमाई लगाकर यहां मकान बनाए हैं।
लोगों का कहना है कि यदि बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया तो लाखों लोग बेघर हो जाएंगे और उनके सामने पुनर्वास का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
राजनीतिक रंग लेने लगा मुद्दा
O-Zone कॉलोनियों का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मामले में दिल्ली और केंद्र की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा है कि केवल मौखिक आश्वासन से लोगों की चिंता दूर नहीं होगी।
AAP नेताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार संसद में विशेष कानून लाकर इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करे। उनका कहना है कि जब तक संसद में स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं होगा, तब तक लोगों के मन से बेघर होने का डर खत्म नहीं होगा।
DDA और अदालतों की भूमिका
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) का तर्क है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में अनियंत्रित निर्माण पर्यावरण और नदी तंत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी कारण DDA समय-समय पर न्यायालयों के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करता रहा है।
हालांकि, स्थानीय निवासी और जनप्रतिनिधि मानते हैं कि वर्षों से बसे लोगों को बिना पुनर्वास योजना के हटाना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
फिलहाल O-Zone कॉलोनियों को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन इस मुद्दे ने दिल्ली की राजनीति और लाखों परिवारों के भविष्य को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर केंद्र सरकार, DDA और न्यायालयों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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