ईरान में जारी तनाव और हिंसा के बीच भारतीय नागरिकों का पहला ग्रुप शुक्रवार देर रात (16 जनवरी 2026) दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित पहुँचा। विमान के उतरते ही यात्रियों के चेहरों पर राहत साफ दिखी। भारत लौटे नागरिकों ने ईरान के हालात को भयावह बताया और केंद्र सरकार व भारतीय दूतावास की त्वरित कार्रवाई की जमकर सराहना की। कई यात्रियों ने भावुक होकर कहा, “मोदी जी हैं तो हर चीज़ मुमकिन है।”
लौटे भारतीयों की जुबानी: हालात बेहद खराब
भारत पहुँचे नागरिकों ने बताया कि ईरान में हालात तेजी से बिगड़ गए थे। एक यात्री ने कहा, “वहाँ हालात काफी खराब हैं, हमें सुरक्षित निकालने के लिए हम सरकार का धन्यवाद करते हैं।” एक अन्य नागरिक ने कहा, “इंटरनेट बंद था, बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। भारतीय दूतावास ने समय रहते ईरान छोड़ने की सलाह दी, जिसके लिए हम आभारी हैं।” लौटे लोगों के परिजनों ने भी राहत जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।
#WATCH | दिल्ली | ईरान से लौटे भारतीय नागरिक ने कहा:
"वहाँ हालात बहुत खराब हैं। भारत सरकार बहुत सहयोग कर रही है, और दूतावास ने हमें जितनी जल्दी हो सके ईरान छोड़ने की जानकारी दी… 'मोदी जी हैं तो हर चीज़ मुमकिन है'…"#IranCrisis #IndianEvacuation #ModiHaiToMumkinHai… pic.twitter.com/0Wh30OgTeC
— One India News (@oneindianewscom) January 17, 2026
ईरान में बीते कई दिनों से महँगाई, बेरोजगारी और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन धीरे-धीरे हिंसक हो गए। तेहरान समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। हालात बिगड़ने पर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क भी बंद कर दिए गए, जिससे लोग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए। कई भारतीयों को मजबूरी में होटल या घरों में ही कैद रहना पड़ा।
ईरान से लौटे एक भारतीय नागरिक ने बताया, “हम वहाँ करीब एक महीने से थे, लेकिन पिछले एक-दो हफ्तों से हालात बहुत खराब हो गए थे। जब भी बाहर निकलते थे, प्रदर्शनकारी गाड़ी के सामने आ जाते थे। इंटरनेट बंद होने से हम अपने परिवार से संपर्क नहीं कर पाए, जिससे काफी डर और तनाव था।” उन्होंने बताया कि दूतावास से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया था।
स्थिति को देखते हुए 14 जनवरी 2026 को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी की और भारतीय नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी। इसके बाद हेल्पलाइन नंबर सक्रिय किए गए और विशेष उड़ान की व्यवस्था की गई। पहली फ्लाइट में छात्र, जियारत पर गए श्रद्धालु और कामकाजी भारतीय शामिल थे।
ईरान में अभी भी हजारों भारतीय, खासकर छात्र, मौजूद हैं और हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर और विशेष उड़ानों की व्यवस्था की जाएगी। सरकार ने दोहराया कि विदेश में मौजूद हर भारतीय की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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