सोनिया गाँधी के खिलाफ अदालत में याचिका
दिल्ली की एक अदालत में कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की गई है। एडवोकेट विकास त्रिपाठी ने राउज एवेन्यु कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि सोनिया गाँधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल था।
क्या कहा याचिकाकर्ता ने?
मामले में सीनियर एडवोकेट अनिल सोनी और पवन नारंग ने ACJM वैभव चौरसिया के समक्ष दलीलें दीं। उनका कहना था कि 1980 में सोनिया गाँधी का नाम नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में जुड़ा था, जबकि वह 30 अप्रैल 1983 को ही भारत की नागरिक बनीं। इस आधार पर उन्होंने इसे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और संगीन अपराध बताया।
Sonia Gandhi’s tryst with India’s voters’ list is riddled with glaring violations of electoral law. This perhaps explains Rahul Gandhi’s fondness for regularising ineligible and illegal voters, and his opposition to the Special Intensive Revision (SIR).
Her name first appeared… pic.twitter.com/upl1LM8Xhl
— Amit Malviya (@amitmalviya) August 13, 2025
नारंग ने यह भी बताया कि 1982 में सोनिया गाँधी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले दिल्ली पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। उनका कहना है कि यह मामला राजनीति से नहीं, बल्कि कानून और नागरिकता नियमों से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट की प्रतिक्रिया और अगली सुनवाई
4 सितंबर 2025 को हुई सुनवाई में ACJM वैभव चौरसिया ने माना कि शिकायतकर्ता ने पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2025 के लिए तय की।
बीजेपी नेताओं के आरोप
इससे पहले बीजेपी नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया था। सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रेस वार्ता में सवाल उठाया था कि इटली में जन्मीं सोनिया गाँधी का नाम 1980 की मतदाता सूची में कैसे जुड़ गया, जबकि वह 1983 में भारतीय नागरिक बनी थीं।
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर 1980 की मतदाता सूची की कॉपी साझा की थी। इसमें नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र के सफदरजंग रोड स्थित पोलिंग स्टेशन नंबर 145 की मतदाता सूची में इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, संजय गाँधी, सोनिया गाँधी और मेनका गाँधी का नाम दर्ज दिखाया गया था। मालवीय ने आरोप लगाया कि सोनिया गाँधी का नाम मतदाता सूची में जुड़ना चुनावी कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
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