सुप्रीम कोर्ट ने लालकिले के पास हुए भीषण कार धमाके के महज़ एक दिन बाद देश को सख्त संदेश देते हुए कहा है कि आतंकी गतिविधियों में किसी तरह की नरमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंगलवार को कोर्ट ने UAPA के तहत गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील की दलील सुनने के बाद पीठ — जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता — ने तीखे लहजे में कहा कि घटना के ठीक बाद यही सबसे सही वक्त है स्पष्ट संदेश देने का।
कोर्ट ने अभियुक्त के बचाव में रखे गए तर्क — कि बरामद सामग्री केवल इस्लामिक साहित्य है — को खारिज कर दिया। पीठ ने माना कि बरामद सामग्री की प्रकृति और अभियुक्त के ऑनलाइन कनेक्शन—जिसमें वह एक ऐसे व्हाट्सएप समूह का सदस्य था जहाँ ISIS जैसा झंडा लगा हुआ था—यह दर्शाते हैं कि आरोपी की भूमिका गंभीर है और उसकी हिरासत जारी रहनी चाहिए।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियाँ लालकिला ब्लास्ट की तह तक पहुँचने के लिए तमाम सुरागों की पड़ताल कर रही हैं। शुरुआती जांच-पड़ताल में विस्फोट में इस्तेमाल हुई कार — Hyundai i20 — के सहारे यह खुलासा हुआ कि कार को चलाने वाला व्यक्ति डॉ. मोहम्मद उमर था, जिस पर जैश-ए-मोहम्मद से संबंधों का आरोप लग रहा है।
'साफ संदेश देने का ये सही वक्त', जब SC में हुआ दिल्ली ब्लास्ट का जिक्र, संदिग्ध आतंकी को नहीं मिली राहत
लालकिले के पास हुए भीषण कार धमाके के महज़ एक दिन बाद, सुप्रीम कोर्ट ने देश को एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है.
कोर्ट ने कहा कि आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में किसी तरह… pic.twitter.com/nsK8cUKBEE
— One India News (@oneindianewscom) November 12, 2025
जाँच के अनुसार, उमर ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर साजिश रची थी, लेकिन फरीदाबाद में हुई बड़ी बरामदगी और गिरफ्तारियों के बाद घबराकर उसने अकेले ही धमाका कर दिया। फरीदाबाद पुलिस ने धमाके से कुछ घंटे पहले ही लगभग 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट और अन्य विस्फोटक तथा हथियारों का बड़ा जखीरा जब्त किया था और कई लोगों को हिरासत में लिया गया था।
शुरुआती फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई है कि धमाके में ANFO (Ammonium Nitrate Fuel Oil) का उपयोग हुआ था — एक उच्च तीव्रता वाला विस्फोटक मिश्रण जो आमतौर पर बड़े पैमाने के ब्लास्ट में प्रयुक्त होता है। यह तथ्य यह संकेत देता है कि षड्यंत्र की तीव्रता और उसके संभावित प्रभाव को रोकने के लिए त्वरित कार्रवाई कितना आवश्यक थी।
केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियाँ फिलहाल नेटवर्क के अन्य कनेक्शनों, फंडिंग चैनलों और संभावित सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं। साथ ही, कोर्ट के कड़े रुख ने यह संकेत दिया है कि आतंकवाद से जुड़ी गंभीर परीस्थितियों में न्यायपालिका भी शून्य सहनशीलता की नीति अपनाएगी।
देशभर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ऐतिहासिक स्थलों, भीड़भाड़ वाले इलाकों तथा संवेदनशील संस्थानों पर विशेष निगरानी जारी है। जांच जारी है और अधिक जानकारी मिलने पर ही मामले के अन्य पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष दिया जाएगा।
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