गोवा विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस की प्रदेश इकाई में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी GPCC के नए अध्यक्ष के रूप में गिरीश चोडंकर की नियुक्ति के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ने की खबरें हैं। इसी बीच ‘Goa Congress Party’ नाम से एक नए राजनीतिक संगठन के रजिस्ट्रेशन के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘Goa Congress Party’ नाम के नए राजनीतिक संगठन ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। सार्वजनिक नोटिस के मुताबिक, इस संगठन के अध्यक्ष फ्रांसिस्को गुवेइया बताए गए हैं और इसका पंजीकृत कार्यालय वेलसाओ में बताया गया है। चुनाव आयोग ने इस प्रस्तावित रजिस्ट्रेशन पर 30 दिनों के भीतर आपत्तियाँ आमंत्रित की हैं।
सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि गिरीश चोडंकर की नियुक्ति के बाद गोवा कांग्रेस इकाई में मतभेद बढ़े हैं और असंतुष्ट नेताओं का एक गुट अलग राजनीतिक संगठन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए संगठन का नाम कांग्रेस से मिलता-जुलता होने के कारण इसे संभावित अलगाव या राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
गिरीश चोडंकर की नियुक्ति के बाद बढ़ी हलचल
कांग्रेस ने 29 मई 2026 को गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी में नियुक्तियों की घोषणा की थी। इसी के बाद गिरीश चोडंकर को प्रदेश इकाई में नई जिम्मेदारी मिली और राज्य संगठन में राजनीतिक हलचल बढ़ गई। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी प्रेस रिलीज में गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नियुक्तियों की जानकारी दी गई थी।
गोवा में अगले विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में चुनाव से पहले संगठनात्मक बदलाव और नए प्रदेश नेतृत्व को लेकर असंतोष कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है। राज्य में कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी वोटों को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस का आरोप: BJP की ‘प्रॉक्सी पार्टी’ रणनीति
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गोवा कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि BJP चुनाव से पहले विपक्ष और सेक्युलर वोटों को बाँटने के लिए ऐसे राजनीतिक संगठनों को बढ़ावा दे रही है। गिरीश चोडंकर ने आरोप लगाया कि BJP सालसेटे क्षेत्र में कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को कमजोर करने के लिए एक नई ‘सेक्युलर’ पार्टी खड़ी करने की योजना बना रही है।
चोडंकर ने दावा किया कि पहले ‘Save Goa’, फिर ‘Goa Vikas Party’ और अब कथित ‘Goa Congress Party’—ये सभी BJP समर्थित अस्थायी प्रॉक्सी संगठन हैं। उनके अनुसार, इनका उद्देश्य असली राजनीतिक विकल्प बनना नहीं, बल्कि चुनाव से पहले कांग्रेस और BJP-विरोधी वोटों को विभाजित करना है।
‘मिशन सालसेटे’ को लेकर कांग्रेस का हमला
गोवा कांग्रेस ने BJP के कथित ‘Mission Salcete’ को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने दावा किया कि BJP नेता विकास प्रभुदेसाई ने इस मिशन का खुलासा किया है, लेकिन BJP ने इस पर कोई स्पष्ट खंडन या स्पष्टीकरण नहीं दिया। कांग्रेस का कहना है कि BJP की चुप्पी इस पूरे मामले में उसकी भूमिका पर सवाल खड़े करती है।
चोडंकर ने आरोप लगाया कि BJP पैसे, राजनीतिक प्रभाव और प्रॉक्सी पार्टियों के सहारे सेक्युलर वोटों को बाँटने की कोशिश कर रही है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, BJP ने इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों की अलग राय
रिपोर्ट में राजनीतिक पर्यवेक्षकों के हवाले से कहा गया है कि ‘Goa Congress Party’ को सीधे BJP प्रॉक्सी मानना जल्दबाजी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह संगठन गोवा कांग्रेस की कार्यप्रणाली से नाराज असंतुष्ट कांग्रेस नेताओं या कार्यकर्ताओं की पहल भी हो सकता है।
इससे संकेत मिलता है कि गोवा कांग्रेस के भीतर असंतोष की जड़ें केवल बाहरी राजनीतिक चालों तक सीमित नहीं हो सकतीं, बल्कि संगठनात्मक निर्णय, नेतृत्व परिवर्तन और टिकट वितरण की आशंकाएँ भी इस तनाव को बढ़ा सकती हैं।
चोडंकर का दावा: कांग्रेस में कोई फूट नहीं
गिरीश चोडंकर ने पार्टी में किसी भी तरह की फूट के दावों को खारिज किया है। उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस में कोई विभाजन नहीं है और पार्टी एकजुट है। उनके मुताबिक, कांग्रेस पहले से ज्यादा मजबूत है और गोवा के हर क्षेत्र में अपना समर्थन बढ़ा रही है।
चोडंकर ने कहा कि अफवाहें फैलाने और भ्रम पैदा करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उन्होंने दावा किया कि गोवा की जनता BJP की रणनीति को समझ चुकी है और आगामी चुनाव में बदलाव तय है।
2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने चुनौती
गोवा की राजनीति में छोटे दलों, क्षेत्रीय समूहों और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका अक्सर महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में अगर ‘Goa Congress Party’ जैसा नाम चुनाव से पहले औपचारिक रूप से सामने आता है, तो यह कांग्रेस के लिए राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती बन सकता है।
कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपने पारंपरिक वोट बैंक, खासकर सालसेटे जैसे क्षेत्रों में समर्थन को एकजुट रखे। वहीं BJP पर लगाए गए आरोपों को लेकर आगे राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। फिलहाल सबकी नजर चुनाव आयोग की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति और असंतुष्ट नेताओं की अगली चाल पर है।
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