बिहार के गया जिले के बाँकेबाजार थाना क्षेत्र से नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण और आपत्तिजनक वीडियो बनाने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी रेहान अंसारी को पटना से पकड़ लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी पहले फरार बताया जा रहा था और पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी।
मामला तब सामने आया जब एक नाबालिग पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रेहान अंसारी इंस्टाग्राम पर रील बनाने और सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बढ़ाने के बहाने लड़कियों को अपने जाल में फँसाता था। इसके बाद उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाने और कुछ वीडियो वायरल होने का आरोप लगा। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी के खिलाफ POCSO Act, IT Act और अन्य गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है।
पटना से पुलिस के हत्थे चढ़ा आरोपी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना सामने आने के बाद आरोपी के दिल्ली भागने की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि बाद में पुलिस की विशेष टीम ने उसे पटना से पकड़ लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि रेहान पटना पुलिस के सामने सरेंडर कर चुका था, जिसके बाद गया पुलिस ने उसे अपनी हिरासत में लिया।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल डिवाइस की तलाश कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट की फॉरेंसिक जांच से इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
कई वीडियो मिलने का दावा, पुलिस कर रही जांच
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जांच के दौरान लड़कियों से जुड़े कई आपत्तिजनक वीडियो होने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्ट्स में ऐसे वीडियो की संख्या 70 तक बताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी के संपर्क में कितनी लड़कियाँ थीं और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग या युवती को भी इसी तरह फँसाया था। शुरुआती जानकारी के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि आरोपी के निशाने पर और भी लड़कियाँ हो सकती थीं।
सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बनाने का आरोप
इस केस ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए नाबालिगों को निशाना बनाए जाने की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। आरोप है कि रेहान अंसारी इंस्टाग्राम रील बनाने के बहाने लड़कियों से संपर्क बढ़ाता था और फिर उन्हें बहला-फुसलाकर निजी वीडियो बनाता था।
पुलिस अब आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड, फोटो-वीडियो फोल्डर, क्लाउड स्टोरेज और अन्य डिजिटल फुटप्रिंट की जांच कर रही है। इस जांच से यह साफ होगा कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या इस मामले में कोई और व्यक्ति भी शामिल है।
POCSO और IT Act के तहत गंभीर कार्रवाई
नाबालिग से जुड़े अपराध होने के कारण यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई शुरू की है। पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों के यौन शोषण, बहलाने-फुसलाने और उनसे जुड़े आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट को लेकर कड़ी सजा का प्रावधान है।
साइबर अपराध से जुड़े पहलुओं की वजह से पुलिस डिजिटल सबूतों को सुरक्षित करने पर भी जोर दे रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि वीडियो किस डिवाइस से बनाए गए, कहाँ स्टोर किए गए और क्या उन्हें किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मैसेजिंग ऐप के जरिए शेयर किया गया।
पीड़िताओं की पहचान सुरक्षित रखना जरूरी
इस मामले में नाबालिग पीड़िता शामिल है, इसलिए कानून के तहत पीड़िता की पहचान उजागर करना प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में किसी भी वीडियो, फोटो, नाम, पता या पहचान से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करना भी कानूनी अपराध हो सकता है।
पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी आपत्तिजनक वीडियो या सामग्री को आगे न बढ़ाएँ। अगर किसी के पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी या डिजिटल सबूत है, तो उसे सीधे पुलिस को उपलब्ध कराया जाए।
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