मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद अब केंद्र सरकार कफ सिरप बनाने वाली दवा कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। सरकार ने देश के सभी राज्यों से इन कंपनियों की सूची मांगी है, ताकि निगरानी को और मजबूत किया जा सके। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी दवा कंपनियों की पहचान होने के बाद उनका ऑडिट शुरू किया जाएगा। यह ऑडिट केंद्र और राज्य दोनों की संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा और इसे अगले एक महीने के भीतर पूरा करने की योजना है।
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कोल्ड्रिफ सीरफ कंपनी के डायरेक्ट को SIT ने चेन्नई से किया गिरफ्तार। इस जहरीली सीरफ को पीने से 21 बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं इसके बाद मध्य प्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव ने बड़ी कार्रवाई की।
मध्यप्रदेश में 2 दिन पहले ही कफ सिरप को पूर्ण तरीके से बैन कर दिया गया था। आज… pic.twitter.com/GQhaWKetxD
— Ocean Jain (@ocjain4) October 9, 2025
भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों की होती है। हर राज्य में दवा नियंत्रण विभाग कार्यरत होता है, जो अपने क्षेत्र में दवा फैक्ट्रियों और बाजार में बिक रही दवाओं की निगरानी करता है। किसी भी दवा के उत्पादन, जांच या बाजार में पहुंचने के बाद उसमें कोई गड़बड़ी मिलने पर पूरी जिम्मेदारी उस कंपनी की होती है, जिसने दवा तैयार की है। राज्य का दवा विभाग हर बैच की जांच नहीं करता। इसी वजह से केंद्र अब कड़े नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार कफ सिरप में हानिकारक केमिकल डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) जैसे तत्वों के इस्तेमाल पर सख्ती से रोक लगाने जा रही है। अगले 10 दिनों में इसके असर दिखने लगेंगे। राज्यों से कंपनियों की सूची मिलने के बाद उनका ऑडिट किया जाएगा, जो एक महीने में पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही एक नया नियम लाने की तैयारी है, जिसमें लापरवाही करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होगा।
सीडीएससीओ के मुताबिक, अब तक तीन दवा कंपनियों के कफ सिरप संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें गुजरात की रेडनेक्स फार्मास्यूटिकल्स की रेस्पिफ्रेश टीआर, तमिलनाडु की श्रीसन फार्मा की कोल्ड्रिफ, और गुजरात की शेप फार्मा की रीलाइफ शामिल हैं। जांच में इन सिरप में भारी मात्रा में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया है। इन तीनों कंपनियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि इनमें से कोई भी उत्पाद भारत से बाहर निर्यात नहीं किया गया, लेकिन देश के कई राज्यों के बाजारों में ये सिरप मिले हैं, जिन्हें अब बाजार से वापस लिया जा रहा है।