मिग-25 से EP-3 तक, वो घटनाएं जब फाइटर जेट बने खुफिया जासूस
आज भले ही ब्रिटेन का एडवांस F-35B स्टील्थ फाइटर जेट केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर हाइड्रोलिक फेल्योर के कारण एक महीने से अधिक समय से खड़ा है, लेकिन भारत और ब्रिटेन के मजबूत रणनीतिक संबंधों के चलते यह केवल तकनीकी सहायता का मामला है। मगर इतिहास में ऐसे भी मौके आए हैं जब किसी देश का फाइटर जेट या खुफिया विमान उसके दुश्मन देश में पहुंच गया, और सामने वाले ने मौके का फायदा उठाते हुए उसका पुर्जा-पुर्जा खोल डाला।
साल 1976: जब सोवियत मिग-25 पहुंचा अमेरिका के पाले में
शीत युद्ध के दौर में 6 सितंबर 1976 को सोवियत पायलट विक्टर बेलेंको ने मिग-25 “फॉक्सबैट” फाइटर जेट लेकर जापान में हाकोदाते एयरपोर्ट पर लैंडिंग कर दी। अमेरिका का सहयोगी होने के कारण जापान ने तुरंत वाशिंगटन को सूचना दी। बेलेंको ने अमेरिका में शरण मांगी, जिसे तत्काल मंजूरी दे दी गई। इस घटना ने अमेरिका को सोवियत टेक्नोलॉजी की अंदरूनी जानकारी पाने का सुनहरा मौका दे दिया।
जापान ने रूस को बताया कि विमान क्षतिग्रस्त है और मरम्मत कर वापस भेजा जाएगा। मिग-25 को चिटोज़ एयरबेस ले जाया गया, जो अमेरिका-जापान द्वारा साझा रूप से संचालित था। वहां अमेरिकी विशेषज्ञों ने विमान के हर पुर्जे को खोलकर उसका गहन विश्लेषण किया। इससे पता चला कि मिग-25 उतना उन्नत नहीं था जितना पश्चिमी दुनिया उसे समझती थी — वह तेज जरूर था, लेकिन उसमें एवियोनिक्स और रडार जैसी प्रणालियां अपेक्षाकृत पुरानी थीं।
साल 2001: जब अमेरिका का EP-3 चीन के कब्जे में आया
1 अप्रैल 2001 को अमेरिका का EP-3 सिग्नल इंटेलिजेंस विमान चीन के दो J-8 फाइटर जेट्स द्वारा इंटरसेप्ट किया गया। टकराव में एक चीनी पायलट मारा गया और EP-3 विमान को मजबूरी में चीन के हैनान द्वीप पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी। चीन ने 24 सदस्यीय चालक दल को हिरासत में लिया और विमान को कब्जे में ले लिया। चीनी सेना ने EP-3 के खुफिया उपकरण उतार लिए और महत्वपूर्ण डेटा एक्सेस कर लिया।
हालांकि 11 दिनों की कूटनीतिक बातचीत के बाद चालक दल को रिहा कर दिया गया, लेकिन चीन ने साफ कर दिया कि विमान केवल तभी लौटेगा जब उसे टुकड़ों में तोड़कर वापस भेजा जाएगा। जुलाई 2001 में विमान के टुकड़े अमेरिका पहुंचे और वहां उसे दोबारा जोड़ा गया तथा सेवा में वापस लाया गया।
तीन घटनाएं, एक सीख
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक सैन्य तकनीक केवल जंग का जरिया नहीं, बल्कि रणनीतिक खुफिया हथियार भी है। चाहे मिग-25 हो, EP-3 या आज का F-35 — अगर ये दुश्मन के हाथ लग जाएं, तो पूरा सैन्य संतुलन प्रभावित हो सकता है। शुक्र है कि भारत और ब्रिटेन मित्र हैं, वरना आज तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर खड़े इस अत्याधुनिक F-35B की कहानी भी कुछ और हो सकती थी।